मंदिर का छठा तहख़ाना नहीं खुल सका

इमेज कॉपीरइट BBC World Service

केरल के तिरुवनंतपुरम में स्थित पद्मनाभस्वामी मंदिर के तहख़ानों में रखे ख़ज़ाने का आकलन कर रही टीम को अपना काम रोकना पड़ा है क्योंकि आख़िरी तहख़ाना नहीं खुल सका है.

अब तक खोले जा चुके पाँच तहख़ानों से क़ीमती पत्थर, सोने और चांदी का भंडार निकल चुका है. और अब कर मिले ख़ज़ाने की क़ीमत एक लाख करोड़ रुपयों तक आंकी जा चुकी है.

हालांकि इतिहासकारों का कहना है कि इस ख़ज़ाने के पुरातात्विक महत्व को ध्यान में रखा जाए तो इसका सही मूल्य आंकना बहुत कठिन होगा.

इसलिए अभी तक मिली चीज़ों का मूल्य नहीं आंका गया है और टीम सिर्फ़ सूची तैयार कर रही है.

छठा तहख़ाना नहीं खुला

इमेज कॉपीरइट BBC World Service
Image caption पद्मनाभस्वामी मंदिर की सुरक्षा कड़ी कर दी गई है

आकलन कर रही टीम का कहना है कि छठे और अंतिम तहख़ाने का बाहरी दरवाज़ा तो खुल गया था लेकिन इसके भीतर लोहे की एक दीवार बनी हुई है.

मंदिर के रिकॉर्ड के अनुसार ये तहख़ाना आख़िरी बार 136 साल पहले खोला गया था.

मंदिर के इन तहख़ानों को खोलकर इसमें रखे ख़ज़ाने का आकलन करने और एक सूची तैयार करने के लिए सुप्रीम कोर्ट ने सेवानिवृत्त जज एनएम कृष्णन के नेतृत्व में सात सदस्यों का एक पैनल बना दिया है.

एनएम कृष्णन का कहना है कि पहले अब तक मिली सामग्री की सूची सुप्रीम कोर्ट को सौंपी जाएगी और फिर उसके बाद शुक्रवार को छठे तहख़ाने को एक बार फिर से खोलने की कोशिश की जाएगी.

उन्होंने कहा, "छठे तहख़ाने को खोलने में कुछ तकनीकी समस्या है. हम शुक्रवार को बैठक में इसके सभी पहलुओं पर चर्चा करेंगे."

उनका कहना था कि इस तहख़ाने को खोलने से पहले तकनीकी विशेषज्ञता की ज़रुरत होगी.

किसका ख़ज़ाना?

इस बीच मंदिर के आसपास सुरक्षा बढ़ा दी गई है. पुलिस ने तहख़ानों में मिली सामग्री का और अधिक विवरण देने से इनकार कर दिया है. उनका कहना है कि इससे ख़ज़ाने की सुरक्षा को ख़तरा हो सकता है.

इस मंदिर को सोलहवीं शताब्दी में त्रावणकोर के राजाओं ने बनवाया था.

ऐसा माना जाता है कि त्रावणकोर के राजाओं ने तहख़ानों के अलावा इस मंदिर की मोटी दीवारों में भी भारी मात्रा में ख़ज़ाना छिपा कर रख दिया था.

ब्रिटेन से मिली आज़ादी के बाद से इस मंदिर की देखरेख एक ट्रस्ट करता है जिसका संचालन त्रावणकोर का राजपरिवार करता है.

आज़ादी के बाद त्रावणकोर राज्य का कोचीन में विलय हो गया था, जो बाद में केरल बना.

इससे पहले एक स्थानीय वकील सुंदर राजन ने हाई कोर्ट में याचिका दायर की थी कि सरकार मंदिर पर नियंत्रण कायम करे क्योंकि जिन लोगों का मंदिर पर नियंत्रण है वे मंदिर की संपत्ति की सुरक्षा नहीं कर सकते क्योंकि मंदिर के पास कोई सुरक्षा बल नहीं है.

हाई कोर्ट ने राज्य सरकार से मंदिर को अपने नियंत्रण में लेने को कहा था.

हाईकोर्ट के इस फ़ैसले के ख़िलाफ़ राजपरिवार के वर्तमान उत्तराधिकारी मार्तंड वर्मा सुप्रीम कोर्ट गए थे लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने उनकी याचिका निरस्त करते हुए हाईकोर्ट के फ़ैसले को सही ठहराया.

सुप्रीम कोर्ट ने ट्रस्ट को मंदिर की सुरक्षा पुलिस के हवाले करते हुए ख़ज़ाने की जाँच के लिए एक सात सदस्यीय पैनल का भी गठन कर दिया था.

इस पैनल में हाईकोर्ट के सेवानिवृत्त जज, मंदिर के अधिकारी, पुरातत्व विभाग के अधिकारी और वर्तमान राजघराने का एक प्रतिनिधि भी शामिल है.

बीच में एक विशेष क़ानून का हवाला देते हुए राजपरिवार ने इस मंदिर को अपने कब्ज़े में लेने की बात कही थी जिस पर लोगों ने नाराज़गी जताई और कहा कि वहाँ जो कुछ है वह अब जनता की संपत्ति है

संबंधित समाचार