तेलंगाना बंद से जनजीवन प्रभावित

केसी राव
Image caption तेलंगाना के समर्थन में इस क्षेत्र से आने वाले कई सांसदों और विधायकों ने इस्तीफ़े दे दिए हैं.

तेलंगाना के समर्थन में बुलाए गए 48 घंटों के बंद के कारण आंध्र प्रदेश के तेलंगाना क्षेत्र में जनजीवन प्रभावित हुआ है.

हैदराबाद सहित तेलंगाना के सभी दस ज़िलों में दुकानें और व्यापार संस्थाएं बंद हैं. बसें सड़कों से गायब हैं और कई स्थानों पर ट्रेन सेवाएं भी प्रभावित हुई हैं.

शिक्षा संस्थानों को बंद कर दिया गया है. सरकारी कर्मचारी और वकील भी बंद में भाग ले रहे हैं.

हैदराबाद में सड़कें खामोश हैं और पेट्रोल पम्प भी बंद पड़े हैं.

तेलंगाना संयुक्त संघर्ष समिति के आहवान पर होने वाले इस बंद को तेलंगाना राष्ट्र समिति, तेलंगाना कांग्रेस, तेलुगु देसम की तेलंगाना फ़ोरम, भारतीय जनता पार्टी सहित कई दलों और अन्य संगठनों का समर्थन प्राप्त है.

त्यागपत्र

ये बंद एक ऐसे समय पर मनाया जा रहा है जब तेलंगाना से आने वाले 93 विधायकों और 15 सांसदों ने अलग राज्य की मांग करते हुए त्याग पत्र दे दिया है. मंगलवार को तेलंगाना राष्ट्र समिति के 11 विधायकों ने भी इस्तीफ़ा दे दिया है.

कांग्रेस के नौ लोक सभा और एक राज्य सभा सदस्य ने कल त्याग पत्र दिया था जबकि तेलुगु देसम के दो लोक सभा सदस्य आज अपना त्याग पत्र लोक सभा स्पीकर को सोंपेंगे.

तेलंगाना राष्ट्र समिति के अध्यक्ष चन्द्रशेखर राव और विजयशांति ने भी कल रात अपना त्यागपत्र स्पीकर को भिजवा दिया है.

किसी भी हालात से निपटने के लिए कड़े सुरक्षा इंतज़ाम किए गए हैं. हैदराबाद में निषेद्य आज्ञा लागू कर दी गई है और पुलिस के साथ-साथ अर्ध सैनिक बल भी स्थिति पर गहरी नज़र रखे हुए हैं.

संघर्ष समिति ने 48 घंटे के बंद के अलावा इस पूरे हफ़्ते के लिए अन्य कार्यक्रमों की घोषणा भी की है.

कार्यक्रम के तहत सात जुलाई को छात्र एक जुलूस निकालेंगे और प्रदर्शन करेंगे. आठ और नौ जुलाई को रेल रोको कार्यक्रम होगा जिसका मक़सद दक्षिणी और उत्तरी भारत से रेल संपर्क तोड़ना होगा. है.

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