विवादों के बीच कृष्णा की बांग्लादेश यात्रा

  • 6 जुलाई 2011
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Image caption दो दिनों की यात्रा पर एसएम कृष्णा बांग्लादेश दौरे पर हैं

विदेश मंत्री एसएम कृष्णा तीन दिनों की बांग्लादेश यात्रा पर आज ढाका पहुँच रहे हैं. माना जा रहा है कि वे कई विवादित द्विपक्षीय मुद्दों पर चर्चा करेंगे.

इन मुद्दों में नदी जल की हिस्सेदारी से लेकर बंगाल की खाड़ी में जल सीमा के निर्धारण भी शामिल है.

एसएम कृष्णा बांग्लादेश की विदेश मंत्री दीपू मुनि के अलावा प्रधानमंत्री शेख़ हसीना, राष्ट्रपति ज़िलुर रहमान, वित्त मंत्री एएमए मुहित और विपक्ष की नेता ख़ालिदा ज़िया से भी मुलाक़ात करेंगे.

बांग्लागेश में भारत की पूर्व उच्चायुक्त बीना सीकरी का कहना है कि एसएम कृष्णा के इस दौरे में चार-पाँच बहुत महत्वपूर्ण फ़ैसले की उम्मीद है.

उन्होंने बताया, "कोशिश होगी कि तीस्ता नदी के पानी की भागrदारी पर अंतरिम समझौता हो. सीमा से जुड़े कुछ मुद्दों पर फ़ैसला हो. व्यापार से जुड़े कई फ़ैसलों की उम्मीद है."

जानकारों का ये भी कहना है कि पिछले दिनों बांग्लादेश पर प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की विवादित टिप्पणी का साया इस दौरे पर बना रहेगा.

प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने अपनी टिप्पणी में ये कह दिया था कि क़रीब 25 प्रतिशत बांग्लादेशी भारत विरोधी हैं.

सवाल

ढाका से बीबीसी संवाददाता अनबरसन एथिराजन का कहना है कि एसएम कृष्णा को मनमोहन सिंह की टिप्पणी पर सवालों का सामना कर सकते हैं.

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Image caption मनमोहन सिंह की टिप्पणी पर काफ़ी विवाद हुआ

दरअसल पिछले दिनों प्रधानमंत्री कार्यालय की वेबसाइट पर मनमोहन सिंह की बांग्लादेश पर की गई टिप्पणी छपी थी. वेबसाइट के मुताबिक़ प्रधानमंत्री ने कहा था कि बांग्लादेश की 25 प्रतिशत जनसंख्या जमाते-इस्लामी की कसमें खाती हैं और वो भारत विरोधी है.

इस बयान के सार्वजनिक होने के बाद काफ़ी विवाद हुआ और फिर वेबसाइट से मनमोहन सिंह की टिप्पणी हटा ली गई और तर्क ये दिया गया कि प्रधानमंत्री ने ये बातें ऑफ़ द रिकॉर्ड कही थी.

प्रधानमंत्री की इस टिप्पणी की राजनयिक हलकों ने काफ़ी आलोचना हुई थी और कई पूर्व राजनयिकों ने ये सवाल भी उठाए थे कि प्रधानमंत्री को ये आँकड़े किसने दिए थे.

लेकिन इस विवाद के बावजूद दोनों देशों ने अपने संबंधों में मज़बूती की बात कही है. माना जा रहा है कि भारत और बांग्लादेश में नदी दल की हिस्सेदारी, सीमा प्रबंधन और व्यापार घाटे पर कोई सहमति बन सकती है.

लेकिन इन समझौतों पर आख़िरी फ़ैसला इस साल सितंबर में मनमोहन सिंह की बांग्लादेश यात्रा के दौरान होने की उम्मीद है.

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