'ख़ज़ाना निकाले जाना का फ़िल्मांकन हो'

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सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि केरल स्थित पद्मनाभस्वामी मंदिर के तहख़ानों में रखे ख़ज़ाने को निकाले जाने के काम का फ़िल्मांकन किया जाए और तस्वीरें खीचीं जाए.

अभी एक तहख़ाना खोला जाना बाकी है. अब तक खोले जा चुके पाँच तहख़ानों से क़ीमती पत्थर, सोने और चांदी का भंडार निकल चुका है.

अब तक मिले ख़ज़ाने की क़ीमत एक लाख करोड़ रुपयों तक आंकी जा चुकी है.

सुप्रीम कोर्ट ने खज़ाने पर हक़ को लेकर चल रहे विवाद पर भी चिंता जताई है. अदालत ने प्रस्ताव दिया है कि मंदिर से मिल रहे ख़ज़ाने की देखभाल के लिए म्यूज़ियम का क्यूरेटर रखा जाए.

कोर्ट ने कहा है कि वो तहखाने से मिली पुरातात्विक महत्व की चीज़ों के रख रखाव के बारे में विशेषज्ञों से सलाह लेगा और फिर इस बारे में राय देगा.

अभी सबकी निगाहें छठे और अंतिम तहख़ाने पर लगी हुई हैं. इसका बाहरी दरवाज़ा तो खुल गया था लेकिन इसके भीतर लोहे की एक दीवार बनी हुई है.

मंदिर के रिकॉर्ड के अनुसार ये तहख़ाना आख़िरी बार 136 साल पहले खोला गया था.

मंदिर के इन तहख़ानों को खोलकर इसमें रखे ख़ज़ाने का आकलन करने और एक सूची तैयार करने के लिए सुप्रीम कोर्ट ने सेवानिवृत्त जज एनएम कृष्णन के नेतृत्व में सात सदस्यों का एक पैनल बना दिया है.

किसका है ख़ज़ाना

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Image caption पद्मनाभस्वामी मंदिर की सुरक्षा कड़ी कर दी गई है

इस मंदिर को सोलहवीं शताब्दी में त्रावणकोर के राजाओं ने बनवाया था. ऐसा माना जाता है कि त्रावणकोर के राजाओं ने तहख़ानों के अलावा इस मंदिर की मोटी दीवारों में भी भारी मात्रा में ख़ज़ाना छिपा कर रख दिया था.

ब्रिटेन से मिली आज़ादी के बाद से इस मंदिर की देखरेख एक ट्रस्ट करता है जिसका संचालन त्रावणकोर का राजपरिवार करता है.

आज़ादी के बाद त्रावणकोर राज्य का कोचीन में विलय हो गया था, जो बाद में केरल बना.

इससे पहले एक स्थानीय वकील सुंदर राजन ने हाई कोर्ट में याचिका दायर की थी कि सरकार मंदिर पर नियंत्रण कायम करे क्योंकि जिन लोगों का मंदिर पर नियंत्रण है वे मंदिर की संपत्ति की सुरक्षा नहीं कर सकते क्योंकि मंदिर के पास कोई सुरक्षा बल नहीं है.

हाई कोर्ट ने राज्य सरकार से मंदिर को अपने नियंत्रण में लेने को कहा था.

हाईकोर्ट के इस फ़ैसले के ख़िलाफ़ राजपरिवार के वर्तमान उत्तराधिकारी मार्तंड वर्मा सुप्रीम कोर्ट गए थे लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने उनकी याचिका निरस्त करते हुए हाईकोर्ट के फ़ैसले को सही ठहराया.

सुप्रीम कोर्ट ने ट्रस्ट को मंदिर की सुरक्षा पुलिस के हवाले करते हुए ख़ज़ाने की जाँच के लिए एक सात सदस्यीय पैनल का भी गठन कर दिया था.

इस पैनल में हाईकोर्ट के सेवानिवृत्त जज, मंदिर के अधिकारी, पुरातत्व विभाग के अधिकारी और वर्तमान राजघराने का एक प्रतिनिधि भी शामिल है.

बीच में एक विशेष क़ानून का हवाला देते हुए राजपरिवार ने इस मंदिर को अपने कब्ज़े में लेने की बात कही थी जिस पर लोगों ने नाराज़गी जताई और कहा कि वहाँ जो कुछ है वह अब जनता की संपत्ति है.

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