मातृ मृत्यु दर में गिरावट आई

  • 8 जुलाई 2011
Image caption सर्वेक्षण के मुताबिक़ मातृ मृत्यु दर में सबसे ज़्यादा गिरावट असम राज्य में देखने को मिली है.

स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय के ताज़ा आंकड़ों के अनुसार भारत में मातृ मृत्यु दर में 17 प्रतिशत की गिरावट आई है.

भारत का मातृ मृत्यु अनुपात जहां 2004-06 में 254 था, वहीं 2007-09 में ये आंकड़ा 212 हो गया है.

इसका मतलब ये है कि 2007-09 में हर एक लाख माताओं में से 42 माताओं की जान बचाई गई है.

ग़ौरतलब है कि 2001-03 के मुक़ाबले 2004-06 में इस दर में 16 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई थी.

मंत्रालय के सर्वेक्षण के मुताबिक़ मातृ मृत्यु दर में सबसे ज़्यादा गिरावट असम राज्य में देखने को मिली है, जबकि इस तालिका में उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड दूसरे नंबर पर हैं.

हालांकि सबसे ज़्यादा मातृ मृत्यु दर भी असम राज्य में ही देखने को मिली है. असम के बाद उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड में ये दर सबसे ज़्यादा पाई गई.

जहां तक पंजाब और हरियाणा की बात है, तो रिपोर्ट में इन राज्यों को सराहा गया है क्योंकि 2001-03 में मातृ मृत्यु दर का आंकड़ा बहुत ज़्यादा था, लेकिन 2004-06 में यहां मातृ मृत्यु दर में अच्छी गिरावट देखने को मिली है.

केरल राज्य में लगातार सुधार देखने को मिला है, जहां हर एक लाख माताओं में से केवल 81 माताओं की जन्म देते समय या जन्म देने के कुछ समय बाद मौत हो जाती है.

हालांकि सभी राज्यों में मातृ मृत्यु दर में कमी आई है, लेकिन पश्चिम बंगाल में इस आंकड़े में थोड़ी बढ़त दर्ज की गई है.

सरकारी योजनाएं

2008 में भारत में शिशु मृत्यु दर 53 थी, वहीं एक साल बाद ये संख्या घटकर 50 रह गई है.

इसके अलावा पाँच वर्ष से कम आयु के शिशुओं की मृत्यु दर में भी पाँच अंकों की गिरावट आई है. ये आंकड़ा जहां 2008 में 69 थी, वहीं 2009 में ये संख्या 64 रह गई है.

केंद्रीय सरकार ने हाल ही में ‘जननी शिशु सुरक्षा कार्यक्रम नाम’ की एक योजना शुरू की थी, जिसके तहत गर्भवती महिला को हर तरह की चिकित्सकीय सुविधाएं दिए जाने का प्रावधान है.

इस योजना में गर्भवती महिला बच्चे को जन्म देने के लिए अगर सरकारी अस्पताल की सुविधाओं का इस्तेमाल करती है, तो सभी सुविधाएं मुफ़्त होंगी.

अगर गर्भवती महिला को प्रसव के दौरान कोई परेशानी आती है, तो उसे यातायात की सुविधा भी मुफ़्त दी जाएगी.

सरकार का कहना है कि अस्पताल में इलाज के दौरान गर्भवती महिला को मुफ़्त चैकअप, दवाइयां, खून और आहार भी मुहैया करवाया जा रहा है.

ज़मीनी हालात

हालांकि मातृ मृत्यु दर से जुड़े इन सरकारी आंकड़ों पर संदेह जताते हुए स्वास्थय पर योजना आयोग के सदस्य डॉक्टर शकील रहमान ने कहा, "भारत में कई राज्य ऐसे हैं, जहां जन्म और मृत्यु से जुड़े आंकड़ों को ठीक से दर्ज नहीं किया जाता. ऐसे में सवाल ये उठता है कि सभी मातृ मृत्यु को दर्ज किया जा रहा है या नहीं. हालांकि सरकारी आंकड़े होने के नाते इन पर विश्वास करने की मजबूरी भी हो जाती है."

साथ ही सरकारी स्वास्थय योजनाओं के बारे में उनका कहना था कि सरकार योजनाएं तो बहुत सी लाती है, लेकिन उनका अमल नहीं हो पाता.

बीबीसी से बातचीत में उन्होंने कहा, "सरकारी अस्पताल में जन्म देने पर गर्भवती महिलाओं को सरकार कुछ रुपये देती है, जिसकी वजह से महिलाएं सरकारी अस्पतालों में आ रही हैं. लेकिन ज़मीनी हालात बेहद ख़राब हैं. अस्पताल में न तो उन्हें मुफ़्त दवा दी जाती है, और न ही उनके लिए कोई एंबुलेंस मुहैया करवाई जाती है. ग्रामीण इलाकों के सरकारी अस्पताल में सुविधाओं का ढांचा बहुत ख़राब है, जिस पर सरकार का ध्यान जाना ज़रूरी है."

मातृ मृत्यु दर को कम करना संयुक्त राष्ट्र के सहस्राब्दी विकास का एक लक्ष्य है. भारत ने इस दर को साल 2015 तक 109 तक गिराने का बीड़ा उठाया है.

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