गांव के लिए बढ़ेंगी बैंकिंग सुविधाएं

प्रणव मुखर्जी
Image caption प्रणव मुखर्जी ने मार्च 2011 में समाप्त वित्तीय वर्ष के दौरान बैंकों के कामकाज की समीक्षा की है

बढ़ती ब्याज दरों और आर्थिक वृद्घि की रफ्तार धीमी पड़ने की आशंकाओं के बीच वित्तमंत्री प्रणव मुखर्जी ने सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों और वित्तीय संस्थानों के प्रमुखों के साथ एक समीक्षा बैठक की है. इस बैठक में मार्च 2011 में समाप्त वित्तीय वर्ष के दौरान बैंकों के कामकाज की समीक्षा की गई. सरकार ने चालू वित्तवर्ष 2010-12 के लिए कृषि ऋण का लक्ष्य 3 हज़ार 75 हज़ार करोड़ रुपये को बढ़ाकर 4 हज़ार 75 हज़ार करोड़ रुपये कर दिया है.

प्रणव मुखर्जी ने कहा कि अगले साल मार्च तक दो हज़ार से ज़्यादा की आबादी वाले सारे गाँवों में बैंकिंग सुविधा उपलब्ध होगी. उन्होंने कहा कि दो हज़ार से ज़्यादा की आबादी वाले 73 हज़ार गाँवों में बैंकिंग सुविधा नही है.

हर गाँव में बैंक

अब तक 29 हज़ार गाँवों में बैंकिंग सुविधा उपलब्ध हो चुकी है , बाकी के 43 हज़ार गाँवों में अगले साल मार्च तक ये सुविधा उपलब्ध करा दी जाएगी.

वित्तमंत्री ने कहा कि सूक्ष्म, लघु और मध्यम उघोगों के लिए दिए जाने वाले कर्ज़ में 35 फ़ीसदी की बढ़ोत्तरी हुई है. किसान क्रेडिट कार्ड योजना के तहत 31 दिसम्बर 2010 तक 9.81 करोड़ कार्ड वितरित किए गए हैं.

वित्त वर्ष 2010-11 के लिए किसान क्रेडिट कार्ड की संख्या में 20 प्रतिशत बढ़ोतरी हुई हैं. साथ ही बैकों के मुनाफ़े में भी 14 फ़ीसदी की वृद्धि हुई है. पर वित्तमंत्री ने उन संसाधनों पर चिंता जताई जो आशा के अनुरूप प्रदर्शन नहीं कर रहे और साथ ही उनकी तादाद बढ़ती जा रही है.

प्रणब मुखर्जी ने इस बैठक में आधारभूत ढांचे के लिए ऋण, शहरी ग़रीबों के आवास के लिए ब्याज सब्सिडी योजना को लागू करने और अल्पसंख्यकों के लिए ऋण के बारे में भी विचार-विमर्श किया.

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