महापंचायत के लिए तैयार अलीगढ़

Image caption गोरौला गांव जहां राहुल गांधी शुक्रवार को पहुंचे थे.

अलीगढ के नुमाईश मैदान में होने वाली महापंचायत के लिए पूरा शहर तैयार है. दिल्ली से अलीगढ़ तक रास्ते भर राहुल गाँधी के अनगिनत पोस्टर्स लगे हुए हैं.

शुक्रवार को लाऊडस्पीकरों से कल होने वाली पंचायत के बारे में लोगों को बताया जा रहा था.

उधर किसानों ने भी राहुल गाँधी से ख़ासी उम्मीदे बाँध रखी हैं, खासकर वो जिस अपनेपन से लोगों के घर जा रहे हैं,उनके घर का ही बना खाना खा रहे हैं, और वहीं सो रहे हैं. सुबह वहीं शौचालय जा रहे हैं और उन्हीं की तरह नहा-धोकर वो फिर आगे निकल जाते हैं.

टीवी औऱ इंटरनेट के ज़माने में राहुल गाँधी का लोगों से निजी तौर पर मिलना भारतीय नेताओं का लोगों तक अपनी बात पहुँचाने के पारंपरिक तरीके की याद दिलाता है.

राहुल शुक्रवार सुबह गौरोला पहुँचे और लोगों को विश्वास दिलाया कि किसानों को फ़ायदा पहुँचाने के लिए ज़मीन अधिग्रहण कानून में संशोधन किया जाएगा, हालाँकि गाँव वाले ये चुटकी लेने से नहीं चूके कि राहुल ने बढ़ते हुए डीज़ल और पेट्रोल के दामों पर कुछ खास नहीं कहा.

गाँव के रहने वाले जीतेंद्र सिंह बेहद खुश हैं कि राहुल गाँधी उन्हीं की तरह देहाती भाषा में ही लोगों से बात करते हैं.

Image caption किसान महिपाल सिंह कहते हैं कि कम से कम राहुल गांधी मिल तो रहे हैं.

स्थानीय निवासी लक्षमण सिंह कहते हैं कि ये पहली बार है किसी नेता ने उनकी खोज-खबर ली है, और यहाँ आकर उन्हें इज़्ज़त दी है.

गाँव वालों का कहना है कि वोट मांगने के अलावा किसी नेता ने ऐसा कुछ भी नहीं किया जो राहुल ने किया. उनकी परेशानी सुनने आज तक कोई भी नहीं आया.

कहानी वही पुरानी, ज़मीन अधिग्रहण को लेकर लोगों की नाराज़गी है. गाँव में रहने वालों कई लोगों की ज़मीनें यमुना एक्सप्रेसवे के लिए ले ली गईं.

कुछ ने अपनी पसंद से दी, कुछ से कथित तौर पर ज़बरदस्ती ले ली गई.

किसान महिपाल सिंह सवाल करते हैं कि सरकार उन्हें ज़मीन के मात्र तीन लाख क्यों दे रही है जब नोएडा में इससे कही ज्यादा रक़म बांटी गई है.

लेकिन मुआवज़ा मिलना कभी कभी समस्या को बढ़ा रहा है. कई लोग जिन्हें मुआवज़ा मिला, उन्होंने पैसा गाड़ी खरीदने और कर्ज़ चुकाने में खर्च कर दिया.

उनका आगे का भविष्य अनिश्चित है. एक ने कहा, अब तो नौकरी करके ही गुज़ारा करना पड़ेगा.

साथ ही बैठे एक और किसान ने कहा, हम अपनी अगली पीढ़ी को मुश्किल में छोड़कर जा रहे हैं.

जाट-बहुल इस गाँव से विधायक सतपाल सिंह अजीत सिंह की पार्टी लोकदल के हैं, लेकिन कई किसानों का कहना है कि आने वाले विधानसभा चुनाव में वो कांग्रेस को ही वोट देंगे.

एक किसान ने राहुल के बारे में कहा, कम से कम लड़का मेहनत तो कर रहा है.

लक्ष्मण सिंह कहते हैं कि नोएडा से आगरा तक किसान मायावती से बेहद नाराज़ हैं, और इसका असर अगले साल के चुनाव में दिखेगा.

जानकारों का कहना है कि राहुल गाँधी की इस यात्रा ने कम से कम सरकार के 'सर्वजन हिताय, सर्वजन सुखाय' के दावे को चकनाचूर ज़रूर कर दिया है कि उसके राज में किसान खुश है.

राहुल गाँधी की यात्रा के कारण बड़ी संख्या में पत्रकार गाँवों में जाकर किसानों से मिल रहे हैं और उनकी परेशानियों को सुन रहे हैं.

उनकी बातें आखिरकार बाहर की दुनिया तक पहुँच रही हैं.

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