मनवीर सिंह तेवतिया गिरफ़्तार

मनवीर सिंह तेवतिया(फ़ाईल फ़ोटो) इमेज कॉपीरइट BBC World Service
Image caption यूपी में सभी विपक्षी पार्टियों ने मनवीर सिंह तेवतिया की गिरफ़्तारी की निंदा की है.

उत्तर प्रदेश में ग्रेटर नोएडा के भट्टा-परसौल गांव में किसान आंदोलन की अगुआई करने वाले किसान नेता मनवीर सिंह तेवतिया को शनिवार को गिरफ़्तार कर लिया गया.

मई महीने की सात तारीख़ को भट्टा-परसौल गांव में पुलिस और किसानों के बीच हुए संघर्ष के बाद वो फ़रार चल रहे थे.

किसानों की लड़ाई से चमके मनवीर सिंह तेवतिया के शनिवार को अलीगढ़ में हुई कांग्रेस की किसान महापंचायत में भी शामिल होने की बात कही जा रहीं थीं. लेकिन उससे पहले ही उन्होंने गिरफ़्तार कर लिया गया.

तेवतिया की गिरफ़्तारी पर प्रतिक्रिया देते हुए राज्य की प्रदेश अध्यक्ष रीता बहुगुणा जोशी ने एक बयान जारी कर कहा कि तेवतिया की गिरफ़्तारी असंवैधानिक तरीक़े से की गई है.

'निंदा'

रीता बहुगुणा के अनुसार तेवतिया की जान को ख़तरा है और अगर उनको कुछ होता है तो उत्तर प्रदेश सरकार उसकी ज़िम्मेदार होगी.

समाजवादी पार्टी ने भी तेवतिया की गिरफ़्तारी की निंदा की है.

पार्टी के उत्तर प्रदेश अध्यक्ष राजेंद्र चौधरी ने कहा कि भट्टा-परसौल के किसान नेता मनवीर सिंह तेवतिया की गिरफ़्तारी किसान आंदोलन के दमन की बसपा सरकार की मंशा से की गई कार्यवाही है.

राजेंद्र चौधरी के अनुसार राज्य की मुख्यमंत्री मायावती ने बदले की भावना से उनका दिल्ली से अपहरण कराया है और तेवतिया के इन्काउटंर किए जाने का अंदेशा होता है.

इससे पहले नोएडा के नगर पुलिस अधीक्षक अनन्त देव तिवारी ने बताया कि गत सात मई को मुआवज़े की मांग को लेकर भट्टा पारसौल गांव में धरने पर बैठे किसानों को भड़काकर पुलिस पर गोलीबारी कराने के आरोपी 50 हज़ार रुपए के इनामी तेवतिया को नोएडा पुलिस ने दिल्ली के हौज़खास़ क्षेत्र से गिरफ़्तार किया.

गिरफ़्तार करने के बाद उन्हें नोएडा ले जाया गया.

पुलिस अधीक्षक तिवारी के अनुसार तेवतिया दिल्ली में एक कांग्रेसी नेता के मकान में रह रहे थे और जब पुलिस टीम तेवतिया को गिरफ़्तार करने पहुंची तो वह पुलिस वाहन में अपनी कार से टक्कर मारकर भाग गए लेकिन पुलिस ने उनका पीछा करके उन्हें पकड़ लिया.

उल्लेखनीय है कि बुलंदशहर के निवासी तेवतिया की अगुआई में भट्टा- परसौल में किसानों ने कथित तौर पर चार बार अधिकारियों और कर्मचारियों को बंधक बनाया था और उनकी पिटाई की थी.

इसी साल सात मई को भी भट्टा-परसौल गांव में तीन रोडवेज़ कर्मियों को बंधक बनाया गया था. उन्हें मुक्त कराने के दौरान किसानों और पुलिस के बीच हिंसक संघर्ष हुआ था, जिसमें दो किसानों और दो पुलिसकर्मियों की मौत हो गई थी.

उसके बाद से ही तेवतिया फ़रार चल रहे थे.पुलिस के अनुसार उनके दूसरे साथियों की तलाश जारी है.

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