दफनाया गया हाथियों को

Image caption दुधवा के जंगलों में बड़ी संख्या में हाथी रहते हैं.

नेपाल सीमा से सटे लखीमपुर खीरी जिले में दुधवा के जंगल के पास शुक्रवार की सुबह बिजली का करेंट लगने से मरे तीनों हाथियों को पोस्ट मार्टम के बाद दफना दिया गया है. इन हाथियों की मौत से जंगल का हाथी समुदाय बहुत दुखी हैं.

दुधवा जंगल की सीमा से बाहर बुधौलिया गाँव में यह दर्दनाक दुर्घटना उस समय हुई जब हाथियों ने संभवत अपनी पीठ खुजाते समय बिजली का एक खम्भा उखाड डाला.

खम्भा गिरते ही बिजली के तार नीचे गिर गए और करेंट लगने से एक बच्चे समेत तीनों हाथियों की दर्दनाक मौत हो गयी.

अपने साथियों के इस तरह बेमौत मारे जाने से जंगल का हाथी समुदाय बेचैन हो गया.

जोर से चिंघाड़ते हाथियों के डर से जानवरों के डाक्टर शुक्रवार को केवल एक हाथी का पोस्ट मार्टम कर पाए. हाथी रात भर रोते बिलखते रहे. शनिवार को दिन में जब हाथी समुदाय जंगल चला गया , तब बाकी दोनों हाथियों का पोस्ट मार्टम हो पाया.

इनमे से हथिनी गर्भवती थी. करेंट लगने से कराह रही हथिनी के पेट में पल रहा लगभग दस महीने का बच्चा बाहर आ गया था. हाथी का बच्चा करीब दो साल तक पेट में रहने के बाद पैदा होता है.

पोस्ट मार्टम में हाथियों के दिल फटे पाए गए जो इस बात की पुष्टि करता है कि उनकी मौत बिजली का करेंट लगने से हुई. फिर भी विसरा सुरक्षित रख लिया गया है. इसे जांच के लिए बरेली भेजा जाएगा.

उत्तरी खीरी वन प्रभाग के अधिकारी ए एन सिंह ने बताया कि तीनों मृत हाथियों को वहीं पास में गड्ढा खोदकर दफना दिया गया है.

वन अधिकारियों का कहना है कि हाथी एक सामाजिक जानवर है और वह झुण्ड में संयुक्त परिवार की तरह रहता है. एक दूसरे के सुख दुःख बांटता है. इसलिए रात में वे फिर घटनास्थल पर आ सकते हैं.

हाथी बहुत समझदार जानवर माना जाता है. जिस तरह मनुष्य अपने प्रियजनों का की मौत का शोक मनाते हैं , उसी तरह हाथी भी. जंगल महकमे के जानकार लोगों का कहना है कि हाथियों का यह झुण्ड साल भर बाद श्राद्ध मनाने के लिए फिर उस जगह पर आएगा , जहाँ उनके तीन साथी बिजली का करेंट लगने से मारे गए.

अब हाथियों के शांत होने का इंतज़ार किया जा रहा है.

दुधवा रिजर्व फारेस्ट के निदेशक शैलेश प्रसाद ने घटना को बहुत दुखद बताते हुए कहा कि , ‘ इन हाथियों की मौत से हम बहुत दुखी हैं. हम वह सभी जरुरी कदम उठाएंगे , जिनसे भविष्य में ऐसी दुर्घटना दुबारा न हो.

श्री प्रसाद के मुताबिक इस समय दुधवा जंगल और आसपास करीब सत्तर जंगली हाथी हैं. ये हाथी भोजन और पानी की तलाश में नेपाल से इधर आते हैं.

दुधवा के आस पास गन्ने की खेती होती है. गन्ना हाथियों का प्रिय भोजन है और उसके लिए ये हाथी जंगल से सटे गाँवों में गन्ने के खेतों में चले जाते हैं.

अनुमान है कि यह तीन हाथियों का झुण्ड खेतों में गन्ना चरने गया था. मगर उन्हें क्या पता कि जिसे वह पेड समझकर अपनी पीठ खुजा रहे हैं उसके ऊपर गुजर रहे तारों में जानलेवा बिजली का करेंट दौडता है.

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