कार्रवाई में चिदंबरम का हाथ:रामदेव

रामदेव
Image caption रामलीला मैदान से रामदेव और उनके समर्थकों को खदेड़ने का फ़ैसला कब और क्यों लिया गया

योग गुरु बाबा रामदेव ने सुप्रीम कोर्ट में आरोप लगाया है कि रामलीला मैदान पर हुई ज़्यादतियों के पीछे गृह मंत्री पी चिदंबरम का हाथ था.

सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली के रामलीला मैदान में भ्रष्टाचार और काले धन के मुद्दे पर अनशन पर बैठे योग गुरू बाबा रामदेव और उनके समर्थकों को वहाँ से जबरन हटाए जाने पर केंद्र सरकार से जवाब तलब किया था.

अदालत ने इस मामले का अपने आप संज्ञान लेते हुए केंद्र सरकार, दिल्ली प्रशासन और पुलिस को नोटिस जारी कर दो सप्ताह में इसका जवाब देने को कहा था.

बाबा रामदेव की ओर से पेश हुए वरिष्ठ वकील राम जेठमलानी ने अदालत से अनुरोध किया कि गृह मंत्री से इस मामले पर सपष्टीकरण मांगा जाए और उन्हें अदालत में स्वयं पेश होने के निर्देश दिए जाएं.

जज बीएस चौहान और जज स्वतंत्र कुमार की पीठ ने कहा कि 4 जून की इस घटना पर दिल्ली पुलिस का जवाब मिलने के बाद ही विचार किया जाएगा.

मामले की अगली सुनवाई के लिए 25 जुलाई की तारीख़ तय की गई है.

जवाब-तलब

पीठ ने कहा कि इस मामले मे चिदंबरम को ये बताना होगा कि जब बाबा को शहर से बाहर निकालने के सरकारी आदेश नहीं थे, तो रामलीला मैदान को ख़ाली करवाने का फ़ैसला कब और क्यों लिया.

अदालत ने दिल्ली पुलिस से एक हलफ़नामा दाख़िल कर इस मामले में स्पष्टीकरण देने को कहा कि रामलीला मैदान में हुई ज़्यादतियों के ख़िलाफ़ बाबा के समर्थकों की शिकायत पर प्रथम सूचना रिपोर्ट क्यों नहीं दर्ज की गई.

अदालत ने अधिकारियों से सवाल किया कि चार जून से तीन दिन पहले की डीवीडी, तस्वीरों और दस्तावेज़ में रामलीला मैदान पर योगाभ्यास होते देखा गया.

फिर ऐसे कौन से हालात बने जिनके मद्देनज़र योगगुरू का आगे का कार्यक्रम रोका गया.

खचाखच भरे रामलीला मैदान से देर रात लोगों को खदेड़ने के लिए पुलिस की ओर से आंसू गैस के गोले और पानी की बौछारों के इस्तेमाल पर भी पीठ ने सवाल उठाए.

सुप्रीम कोर्ट को दिए अपने शपथ पत्र में दिल्ली पुलिस ने कहा था कि उसने केवल आंसू गैस का प्रयोग किया था.

चार जून की देर रात दिल्ली पुलिस और रैपिड एक्शन फोर्स के दस्तों ने रामदेव के शिविर में घुसकर उन्हें और उनके समर्थकों को वहां से जबरन हटा दिया था.

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