तेलंगाना के लिए छात्र अनशन पर

  • 11 जुलाई 2011
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आंध्र प्रदेश में अलग तेलंगाना राज्य के लिए आंदोलन दिनों-दिन तेज़ होता जा रहा है.

एक ओर हैदराबाद के उस्मानिया विश्वविद्यालय के छात्रों ने सोमवार से आमरण अनशन शुरू कर दिया है तो दूसरी और त्यागपत्र देने वाले तेलंगाना के कांग्रेसी विधायकों और सांसदों ने भी 13 और 14 जुलाई को अनशन पर बैठने का फ़ैसला किया है.

इसके अलावा सोमवार को पुलिस ने अनेक राजनैतिक दलों के नेताओं को गिरफ़्तार कर लिया, जबकी वे उस्मानिया विश्वविद्यालय जाने की कोशिश कर रहे थे.

विश्वविद्यालय परिसर में रविवार अर्धरात्रि से ही तनाव बढ़ने लग गया था जब पुलिस ने छात्रों के अनशन को रोकने के लिए वहां छपा मारा और छात्रों की संयुक्त समिति के कई नेताओं को गिरफ़्तार कर लिया. उसके बावजूद सोमवार को 50 से ज़्यादा छात्र-छात्राएं अनशन पर बैठ गए. जब कुछ छात्रों ने जुलूस निकलने की कोशिश की, तो पुलिस और अर्धसैनिक बलों ने उन्हें रोक दिया.

इस पर दोनों के बीच झड़प हो गई. छात्रों ने पत्थर फेंके और पुलिस ने शक्ति का उपयोग किया.

हैदराबाद के पुलिस आयुक्त अब्दुल क़यूम ख़ान ने कैम्पस में की गई कार्रवाई का बचाव करते हुए कहा कि छात्रों को अनशन पर बैठने की अनुमति नहीं थी.

गिरफ़्तारी

इसके अलावा पुलीस ने तेलंगाना से कांग्रेस के सांसदों और विधायकों सहित कई दलों के नेताओं को उस समय हिरासत में ले लिया, जब अनशन पर बैठे छात्रों से मिलने के लिए यह नेता वहां जा रहे थे.

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Image caption कई कांग्रेसी नेताओं को भी हिरासत में लिया गया

गिरफ़्तार होने वालों में तेलंगाना राष्ट्र समिति, भारतीय जनता पार्टी के नेता और तेलुगूदेसम के कुछ बाग़ी नेता भी शामिल थे.

कांग्रेस के एक सांसद मधु याश्की ने पुलिस और सरकार के व्यवहार की निंदा करते हुए कहा कि इस तरह की कार्रवाई से किसी आंदोलन को नहीं दबाया जा सकता.

इधर एक और महत्वपूर्ण घटना में कांग्रेस के उन तमाम नेताओं की एक बैठक हैदराबाद में हुई, जिन्होंने पिछले सप्ताह ही विधानसभा और लोक सभा से त्यागपत्र दे दिया था.

बैठक में फ़ैसला किया गया कि वे भी तेलंगाना राज्य के समर्थन में 13 और 14 जुलाई को अनशन पर बैठेंगे. यह अनशन नुमाइश मैदान पर होगा, जिसमें हज़ारों लोगों के उपस्थित होने की संभावना है.

इन नेताओं ने उन रिपोर्टों का खंडन किया कि वो जल्द ही कांग्रेस छोड़ कर अलग पार्टी बनाने वाले हैं.

आरोप

इस गुट के नेता के जाना रेड्डी ने कहा कि आंध्र क्षेत्र के समाचार साधन जान-बूझकर इस तरह का ग़लत प्रचार कर रहे हैं. उन्होंने कहा कि तेलंगाना के नेता कांग्रेस में रह कर ही अलग राज्य के लिए लड़ेंगे.

इधर भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी ने भी सोमवार को पूरे तेलंगाना के 10 ज़िलों में ज़िलाधिकारी के कार्यालयों का घेराव किया और रास्तों पर ट्रैफ़िक रोक दी.

उसकी मांग थी कि केंद्र सरकार जल्द ही तेलंगाना राज्य बनाने का बिल संसद में पेश करे. पुलिस ने सीपीआई के सैकड़ों कार्यकर्ताओं को गिरफ़्तार कर लिया.

कांग्रेस आला कमान ने ज़बान खोली

इधर ऐसा लगता है कि अपने विधायकों और सांसदों के इस्तीफ़े से परेशान कांग्रेस आलाकमान नींद से जागने लगी है और उसने पहली बार औपचारिक रूप से इस विषय पर अपनी ज़ुबान खोली है. कांग्रेस के महासचिव और प्रवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने दिल्ली में पत्रकारों से कहा कि पार्टी जल्द ही तेलंगाना के विषय पर एक घोषणा करेगी.

उन्होंने कहा कि पार्टी इस समस्या को सुलझाने की कोशिश कर रही है और केंद्रीय मंत्रिमंडल में विस्तार के बाद यह घोषणा की जाएगी.

पहली बार खुल कर कोई बात करते हुए उन्होंने कहा कि पार्टी के सामने तीन विकल्प हैं. इनमें पहला एक वर्ष के अंदर तेलंगाना राज्य की स्थापना, दूसरा हैदराबाद के बिना तेलंगाना की स्थापना और तीसरा राज्यों के पुनर्गठन आयोग की स्थापना.

मुद्दा

उन्होंने तमाम क्षेत्रों के नेताओं से कहा कि वो भड़काने वाले बयान न दें क्योंकि यह एक संवेदनशील मुद्दा है.

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Image caption कई छात्रों पर नेताओं पर कार्रवाई हुई है

जहाँ तक दूसरे विकल्पों का सवाल है, तेलंगानावादी नेता और संगठन पहले ही यह कह चुके हैं कि उन्हें ऐसा तेलंगाना राज्य चाहिए जिसकी राजधानी हैदराबाद हो.

लेकिन लगता है कि आलाकमान कम से कम पांच या दस वर्ष तक हैदराबाद को तेलंगाना और आंध्र दोनों राज्यों की सांझा राजधानी बनाए रखने के सुझाव पर विचार कर रहा है. हैदराबाद की शक्तिशाली मुस्लिम पार्टी मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुसलमीन ने भी स्पष्ट कर दिया है कि अगर तेलंगाना राज्य बनता है तो फिर हैदराबाद को केवल तेलंगाना की राजधानी होना चाहिए.

मजलिस के अध्यक्ष असदुद्दीन ओवैसी ने कहा कि वो हैदराबाद को केंद्र प्रशासित इलाक़ा बनाने को स्वीकार नहीं करेंगे.

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