'डॉक्टर सचान की मौत आत्महत्या नहीं'

Image caption 52 वर्षीय डॉक्टर सचान को 22 जून को लखनऊ की एक जेल में मृत पाया गया था

लखनऊ के डिप्टी सीएमओ डॉक्टर योगेन्द्र सिंह सचान की जेल में मौत के बारे में उत्तर प्रदेश सरकार का यह दावा न्यायिक जाँच में झूठा साबित हुआ है कि उन्होंने आत्महत्या की थी.

मंगलवार को हाईकोर्ट में एक जनहित याचिका पर सुनवाई के दौरान अदालत ने वकीलों को बताया कि न्यायिक जाँच में इसे हत्या का मामला पाया गया है.

दंड प्रक्रिया संहिता में इस बात का प्रावधान है कि हिरासत में में होने वाली मौत की जाँच अनिवार्य रूप से न्यायिक मजिस्ट्रेट द्वारा की जाएगी.

इसी क़ानून के तहत इस बीच लखनऊ के चीफ जुडिशियल मजिस्ट्रेट राजेश उपाध्याय ने डॉक्टर सचान की मौत की परिस्थितियों की जाँच की थी.

चीफ़ जुडिशियल मजिस्ट्रेट उपाध्याय ने सोमवार को अपनी जाँच रिपोर्ट सीलबंद लिफ़ाफ़े में सरकार और हाईकोर्ट को सौंप दी.

सच्चिदानंद उर्फ सच्चे नाम के एक व्यक्ति ने डॉक्टर सचान की मौत की सीबीआई जाँच के लिए जनहित याचिका दाखिल कर रखी है.

मंगलवार को हाईकोर्ट में सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता के वकील ने अदालत से पूछा कि न्यायिक जाँच रिपोर्ट में क्या पाया गया है.

इस पर अदालत ने बताया कि जाँच रिपोर्ट के अनुसार यह आत्म हत्या नहीं, बल्कि सुनियोजित हत्या थी.

जाँच एजेंसी

सुनवाई के दौरान सरकार ने एक बार फिर डॉक्टर सचान की मौत की सीबीआई जाँच का विरोध करते हुए एसआईटी गठित करने का सुझाव दिया.

सरकार का तर्क है कि सी बी आई केन्द्र सरकार के अधीन है इसलिए वह स्वतंत्र जाँच एजेंसी नही है.

जबकि याचिकाकर्ता के वकील का कहना था कि हत्या एक आपराधिक मामला है जिसकी जाँच एस ई टी नही बल्कि सी बी आई ही कर सकती है.

अदालत अपना फैसला वृहस्पतिवार 14 जुलाई को सुनाएगी.

उल्लेखनीय है कि डॉक्टर सचान के परिवार ने सीबीआई जाँच के लिए सुप्रीम कोर्ट में एक अलग याचिका दायर की थी.

सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि इस मामले की जाँच स्वतंत्र एजेंसी से होनी चाहिए.

लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा था कि पहले हाईकोर्ट अपना आदेश दे दे, उसके बाद ही वह विचार करेगा.

मामला

पुलिस ने डॉक्टर सचान को पहले ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन के तहत परिवार कल्याण विभाग में भ्रष्टाचार के मामले सीएमओ डॉक्टर बी पी सिंह और डॉक्टर विनोद आर्य की हत्या के षड्यंत्र में भी मुलज़िम बना दिया गया था.

फिर जेल अस्पताल में संदिग्ध हालात में उनकी मौत हो गई.

ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन कार्यक्रम में पिछले कुछ सालों में उत्तर प्रदेश को केंद्र से लगभग नौ हजार करोड रूपये मिले.

इस कारण उत्तर प्रदेश सरकार ने जिलों में सीएमओ परिवार कल्याण सरकार का अलग पद सृजित किया जिस पर पहले डॉक्टरविनोद आर्य और फिर डॉक्टरबी पी सिंह तैनात हुए.

संयोग से दोनों की एक ही तरीके से हत्या हो गई. डॉक्टर सचान उनके अधीन थे.

डॉक्टर बी पी सिंह की हत्या के बाद सरकार ने माना कि परिवार कल्याण विभाग में भारी पैमाने पर ग़बन और भ्रष्टाचार हुआ.

घोटाले

विभाग में हुए गंभीर घोटालों की जिम्मेदारी लेते हुए स्वास्थ्य मंत्री अनंत कुमार मिश्र और परिवार कल्याण मंत्री बाबू सिंह कुशवाहा ने इस्तीफा दे दिया था.

लेकिन विपक्षी दल इससे संतुष्ट नही हुए. उनका आरोप है कि घोटाले का धन ऊपर मुख्यमंत्री तक जाता था.

समझा जाता है कि इसलिए सरकार सीबीआई जाँच रोकने में पूरा ज़ोर लगा रही है.

इसी कारण पुलिस ने डॉक्टर बी पी सिंह की हत्या के लिए डॉक्टर सचान और तीन अन्य लोगों को जिम्मेदार बताते हुए अदालत में चार्जशीट दाखिल कर दी ताकि यह कहा जा सके कि मामला खुल गया है.

लेकिन ट्रायल कोर्ट ने चार्जशीट पुलिस को लौटाकर तगड़ी फटकार लगाई जिससे मामला दबाने का सरकार का प्रयास विफल हो गया.

संबंधित समाचार