मौक़ा चूक गए मनमोहन

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Image caption मनमोहन सिंह ने चार बड़े मंत्रालय को छोड़ दिया

हाल ही में प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने कुछ संपादकों से बात करते हुए कहा था कि वह ‘लेमडक’ प्रधानमंत्री नहीं हैं. इस मंत्रिमंडल फेरबदल में उन्हें यह मौक़ा मिला था कि वह अपनी इस छवि को धो पाते.

यह वह तभी कर पाते जब वह इस मौक़े का उपयोग मंत्रिमंडल को पूरी तरह बदलने के लिए करते लेकिन वह यह मौक़ा चूक गए. चार सबसे महत्वपूर्ण मंत्रियों को छूने की हिम्मत वह नहीं दिखा पाए.

सिर को उन्होंने बिल्कुल नहीं छुआ. हाँ, धड़ को ज़रूर उन्होंने छूने की कोशिश की वह भी आधे मन और ठिठके क़दमों से.

जयराम रमेश को उन्होंने पदोन्नति देकर कैबिनेट मंत्री ज़रूर बनाया लोकिन यह किसी सो छिपा नहीं है कि पर्यावरण मंत्रालय में उनके कुछ कड़े फ़ैसलों से सरकार अपने आप को असहज महसूस कर रही थी.

जैतापुर, पॉस्को और लावासा के बारे में उनके लिए फ़ैसले कई लोगों को नागवार गुज़र रहे थे. उनका मुँहफट होना भी उनके ख़िलाफ़ जा रहा था.

प्राथमिकता

लेकिन अच्छी बात यह है कि उन्हें ग्रामीण विकास मंत्रालय में भेजा गया है जो इस समय पतवारविहीन है लेकिन राहुल गाँधी की प्राथमिकताओं में काफ़ी ऊपर आता है.

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Image caption जयराम रमेश को ग्रामीण विकास मंत्री बनाया गया है

जयराम रमेश की प्रतिभा का इस्तेमाल इस विभाग को चमकाने में किया जा सकता है. वीरप्पा मोइली को क़ानून मंत्रालय से हटाकर कॉरपरेट मामलों के विभाग में भेजा गया है.

ज़ाहिर है हाल में इनके मंत्रालय में हो रही घटनाओं के लिए कहीं न कहीं उन्हें ज़िम्मेदार माना गया है. लेकिन उनके स्थान पर आए सलमान ख़ुर्शीद इस विभाग के साथ न्याय कर पाएँगे. ऐसी उम्मीद की जा सकती है.

उत्तर प्रदेश में अगले वर्ष होने वाले विधानसभा चुनाव को देखते हुए बेनीप्रसाद वर्मा का कैबिनेट मंत्री बनाया जाना समझ में आता है, लेकिन अगर कांग्रेस नेतृत्व यह सोच रहा हा कि राजीव शुक्ल को मंत्री बनाकर वह उत्तर प्रदेश का चुनाव जीत सकते हैं तो वह बहुत बड़ी ग़लतफ़हमी में हैं.

ठीक इसी तरह पंजाब में भी चुनाव होने वाले हैं लेकिन न तो रवनीत सिंह बिट्टा को प्रधानमंत्री ने अपनी टीम में शामिल किया है और न ही परनीत कौर को और महत्वपूर्ण विभाग दिया गया है.

गठबंधन राजनीति के तहत रेल जैसे महत्वपूर्ण विभाग को दिनेश त्रिवेदी को दिया जाना यह दिखाता है कि मनमोहन सिंह बैल को सींग के बल पकड़ने की हिम्मत नहीं जुटा पाए हैं.

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