क्या है मंत्रियों की प्राथमिकताएँ?

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मंगलवार को प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने अपने मंत्रालय में फेरबदल किया. कुछ नए चेहरे टीम में शामिल किए गए, तो कुछ को हटा दिया गया. कुछ नए विभागों से नाराज़ हैं, तो कुछ काम करने को तत्पर.

आइए जानते हैं कुछ मंत्रियों ने पदभार संभालने के बाद क्या कहा और क्या प्राथमिकताएँ गिनाईं

सलमान ख़ुर्शीद

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क़ानून मंत्रालय का प्रभार संभालने के बाद सलमान ख़ुर्शीद ने कहा है कि उत्तर प्रदेश में एक नया भू-अधिग्रहण क़ानून उनकी प्राथमिकता है.

उन्होंने कहा कि ऐसा ही क़ानून हरियाणा में पहले से ही है और वे चाहते हैं कि ऐसा ही क़ानून उत्तर प्रदेश में भी बने. पहले वीरप्पा मोइली क़ानून मंत्री थे, लेकिन मंगलवार को हुए फेरबदल के बाद उन्हें क़ानून मंत्री बना दिया गया है.

माना जा रहा है कि उत्तर प्रदेश चुनाव को देखते हुए कांग्रेस आलाकमान ने उनका क़द बढ़ाया है.

पद संभालते ही उत्तर प्रदेश के चर्चित और विवाद भू-अधिग्रहण क़ानून पर उनका बयान ये साबित करता है कि उत्तर प्रदेश उनके लिए कितना अहम है. सलमान ख़ुर्शीद के सामने एक और चुनौती है सॉलिसिटर जनरल गोपाल सुब्रह्मण्यम के त्यागपत्र को लेकर चल रहा विवाद.

माना जा रहा है कि जल्द ही सलमान ख़ुर्शीद प्रधानमंत्री से मिलकर इस पर कोई न कोई निर्णय लेना चाहेंगे.

जयराम रमेश

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पर्यावरण और वन मंत्रालय के बाद ग्रामीण विकास मंत्रालय का पदभार संभालने के बाद जयराम रमेश ने भी अपने इरादे स्पष्ट कर दिए हैं. उन्होंने कहा है कि नक्सल प्रभावित इलाक़ों में ग्रामीण विकास सरकारी रणनीति का अहम हिस्सा है.

उन्होंने कहा कि नक्सल प्रभावित लोगों को समाज की मुख्य धारा में शामिल करने के लिए ये देखना होगा कि ग्रामीण विकास से जुड़े कार्यक्रम वहाँ कैसे कारगर होते हैं.

जयराम रमेश भू-संसाधन विभाग पर भी ध्यान देना चाहते हैं क्योंकि इसका ग़रीबों पर असर पड़ता है. जयराम रमेश ने यह भी स्पष्ट किया है कि पर्यावरण और वन मंत्रालय हाथ से निकल जाने का उन्हें कोई दुख नहीं है बल्कि वे ख़ुद भी ग्रामीण विकास मंत्रालय में काम करना चाहते थे.

प्रधानमंत्री ने भी कहा है कि जयराम रमेश को बड़ी ज़िम्मेदारी सौंपी गई है और उन्होंने उम्मीद जताई है कि जयराम रमेश उस पर खरे भी उतरेंगे.

मिलिंद देवड़ा

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दूरसंचार और सूचना तकनीक मंत्रालय में राज्य मंत्री का कार्यभार संभालने के बाद मिलिंद देवड़ा ने कहा है कि वो इससे सहमत नहीं है कि उन्हें उनके पिता के कारण मंत्रालय में जगह मिली है.

मिलिंद देवड़ा के पिता मुरली देवड़ा पहले कंपनी मामलों के मंत्री थे. लेकिन फेरबदल से पहले उन्होंने इस्तीफ़ा दे दिया था.

मिलिंद देवड़ा के पहले गुरुदास कामत दूरसंचार और सूचना तकनीक मंत्रालय में राज्य मंत्री थे.

गुरुदास कामत को राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) बनाया गया था, लेकिन उन्होंने मंगलवार को शपथ नहीं ली और इस्तीफ़ा देने की पेशकश कर दी.

जयंती नटराजन

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जयंती नटराजन नई पर्यावरण और वन मंत्री बनीं हैं. लेकिन उनके सामने कड़ी चुनौती है.

जयंती से पहले जयराम रमेश इस मंत्रालय के प्रभारी थे. जयंती नटराजन ने माना है कि जयराम रमेश ने काफ़ी सराहनीय काम किया है.

जानकारों का भी मानना है कि जिस तरह पर्यावरण को लेकर जयराम रमेश ने कड़े क़दम उठाए, उससे इस मंत्रालय से उम्मीदें बढ़ गई हैं.

जयंती नटराजन का कहना है कि उनका मंत्रालय इसलिए भी अहम है क्योंकि अगर विकास एक सतत प्रक्रिया है, तो पर्यावरण भी उसका एक अहम हिस्सा है.

उन्होंने कहा कि वो जो भी फ़ैसला लेंगी, देशहित को ध्यान में रखकर करेंगी. जंगल में खनन के मुद्दे पर उन्होंने कहा कि वो इस मामले का अध्ययन करेंगी, फिर इस पर कोई टिप्पणी करेंगी.

दिनेश त्रिवेदी

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दिनेश त्रिवेदी को रेल मंत्रालय का ज़िम्मा ऐसे समय में मिला है, जब कुछ दिन पहले ही उत्तर प्रदेश में कानपुर के नज़दीप मलवां रेलवे स्टेशन के पास हावड़ा-कालका एक्सप्रेस दुर्घटनाग्रस्त हो गई और इस दुर्घटना में 69 लोग मारे गए.

दिनेश त्रिवेदी ने पद संभालते ही इसकी घोषणा की कि वे लोगों की ज़िंदगी तो नहीं लौटा सकते, लेकिन मारे गए लोगों के निकट संबंधियों को रेलवे में नौकरी दी जाएगी.

उन्होंने घोषणा की वे रेल मंत्रालय जाने से पहले मलवां जाएँगे. दिनेश त्रिवेदी मलवां गए भी, लेकिन वहाँ उन्हें लोगों के ग़ुस्से का सामना करना पड़ा.

दिनेश त्रिवेदी ने स्वीकार किया कि रेलवे में सुरक्षा कड़ी चुनौती है और वे इस पर ज़रूर ध्यान देंगे. उन्होंने कहा कि सुरक्षा से कोई समझौता नहीं किया जाएगा.

ममता बनर्जी के त्यागपत्र देने के कारण रेल मंत्रालय में कोई कैबिनेट मंत्री नहीं था. जिस समय मलवां में दुर्घटना हुई प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के पास ही रेल मंत्रालय था. जबकि तृणमूल कांग्रेस के मुकुल रॉय रेल राज्य मंत्री थे.

वीरप्पा मोइली

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एक दिन पहले अपने मंत्रालय से नाराज़ लग रहे वीरप्पा मोइली ने 24 घंटे में ही अपना सुर बदल लिया. उन्होंने कहा कि वे अब अपने मंत्रालय से ख़ुश हैं. मंत्रिमंडल फेरबदल में वीरप्पा मोइली को क़ानून मंत्रालय से हटाकर कंपनी मामलों का मंत्रालय दे दिया गया था.

लेकिन वीरप्पा मोइली इससे ख़ुश नज़र नहीं आ रहे थे. उन्होंने यहाँ तक कह दिया था कि क़ानून मंत्रालय से हटाने के पीछे कुछ निहित स्वार्थ काम कर रहे हैं.

लेकिन एक दिन बाद उन्होंने ये कहा कि सोनिया गांधी और प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने उन पर भरोसा करके ही ये मंत्रालय सौंपा है.

वीरप्पा मोइली कहा कि कॉरपोरेट मामलों के मंत्रालय का जिम्मा एक चुनौती है जिसे वो कॉरपोरेट जगत को 'तुरंत न्याय' दिलाकर एक अवसर में बदलेंगे.

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