'भ्रष्टाचार का रोग मेरे विभाग को भी'

  • 16 जुलाई 2011
बिहार की सड़कें (फ़ाईल फ़ोटो)
Image caption नीतीश सरकार ने बिहार की सड़कों को बनवाकर उसका काफ़ी राजनीतिक लाभ उठाया है.

बिहार में ग्रामीण सड़कों के निर्माण और रख-रखाव से जुड़े सरकारी विभाग के मंत्री भीम सिंह अपने विभाग की गड़बड़ियों पर खुलकर बोलने से नहीं हिचकिचाते.

बीबीसी के साथ एक ख़ास बातचीत में उन्होंने कहा कि कार्य दक्षता में कमी और भ्रष्टाचार में वृद्धि वाला जो रोग उनके विभाग को भी लगा है, उसका इलाज़ उन्होंने शुरू कर दिया है.

राज्य की कुल एक लाख पांच हज़ार किलोमीटर सड़कों में से 88 हज़ार किलोमीटर सड़कें ग्रामीण कार्य विभाग के तहत आती हैं.

'प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना ' इस महकमे की सबसे बड़ी योजना है.

बिहार के ग्रामीण कार्य मंत्री भीम सिंह को केंद्र सरकार से शिकायत है कि प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत राज्य की स्वीकृत सड़क योजनाओं के लिए पर्याप्त धन- राशि नहीं दी जा रही है.

उनका यह भी आरोप है कि केंद्र ने राजनीतिक दुर्भावनावश इस योजना के अंतर्गत बिहार से ग्रामीण सड़कों का चयन बंद कर दिया है, जबकि राज्य की कई सड़कें इस योग्य हैं.

लेकिन भीम सिंह केंद्र सरकार के कथित असहयोग से ज़्यादा अपने विभाग की अक्षमता और भ्रष्टाचार को ग्रामीण सड़कों के बेहतर निर्माण और रख-रखाव में बाधक मानते हैं.

'कई ख़ामियां'

उनका कहना है '' हमारे जो कार्यरत अभियंता हैं, उनकी एफ़िसियेंसी(कार्यक्षमता) में कमी है और अगर नीयत ठीक भी हो तो जानकारी का अभाव आड़े आता है.

हमारे विभाग का अपना कोई कैडर नहीं है, इसलिए सिंचाई विभाग से अभियंता लेकर उनसे सड़क निर्माण का काम करवाना पड़ता है. ऐसे में गुणवत्ता से समझौता तो हो ही जाता है. ''

उनसे पूछा गया कि पथ-निर्माण संबंधी तंत्र, प्रक्रिया या नियमों की ख़ामियों के कारण जो ठेकेदार, इंजीनियर या अफ़सर भ्रष्टाचार का रास्ता निकाल लेते हैं, उन्हें कैसे रोका जायेगा ?

भीम सिंह का जवाब था, '' मैं क़बूल करता हूँ कि मेरे विभाग में कई खामियां हैं, भ्रष्टाचार भी है और यही कारण है कि जबसे मैंने मंत्री- पद संभाला है, तब से पांच-पांच कार्यपालक अभियंताओं को निलंबित कर चुका हूँ. कई अन्य के ख़िलाफ़ कार्रवाई चल रही है. ''

उन्होंने ये भी स्वीकार किया कि बिहार में सड़क निर्माण संबंधी ज़रूरी ट्रेनिंग के बिना भी अभियंता और ठेकेदार ग्रामीण सड़कें बना रहे हैं, जो बहुत दुर्भाग्यपूर्ण है.

उनके मुताबिक़ बड़े ठेकेदार 25 लाख से लेकर अधिकतम सौ करोड़ रूपए तक की ग्रामीण सड़क योजनाओं में दिलचस्पी नहीं रखते, इसलिए अक्षम ठेकेदारों से काम चलाना गुणवत्ता को नज़रंदाज़ करने जैसा सवाल बन गया है.

हालांकि उन्होंने दावा किया कि इसका एक उपाय '' पी.पी.पी मोड '' के रूप में सामने है और इसपर अमल भी शुरू हो गया है.

इस तरह लगभग पूरी बातचीत में मंत्री भीम सिंह ने अपनी विभागीय कमज़ोरियों को नहीं छिपाने जैसी साफ़गोई तो दिखाई लेकिन यह उम्मीद भी नहीं छोड़ी कि राज्य में अच्छे मानदंडों पर खरे उतरने वाले पथ निर्माण होकर रहेंगे.

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