सुप्रीम कोर्ट के आदेश को सरकार की चुनौती

  • 15 जुलाई 2011
भारतीय मुद्रा

विदेशी बैंकों में जमा काले धन की जांच के लिए विशेष जांच दल यानि एसआईटी गठित करने के सुप्रीम कोर्ट के फ़ैसले को केंद्र सरकार ने चुनौती दी है.

सरकार का पक्ष है कि न्यायपालिका का आदेश कार्यपालिका के कामकाज में दख़लअंदाज़ी है.

अदालत के सामने दाख़िल एक अर्ज़ी में सरकार ने कहा है कि वो अपने फ़ैसले पर पुनर्विचार करे.

कुछ दिनों पहले केंद्र सरकार की कारवाई पर नाराज़गी जताते हुए सुप्रीम कोर्ट ने काले धन के मामले की जांच के लिए एक विशेष जांच टीम यानि एसआईटी गठित करने का आदेश जारी किया था.

ग़ौरतलब है कि इससे पहले काले धन की जांच के लिए केंद्रीय सरकार ने एक उच्च स्तरीय समिति गठित की थी.

लेकिन कोर्ट का कहना था कि सरकार ने इस मामले की जांच में ढिलाई बरती है और वो इसे टालने की भरपूर कर रही है.

कंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में दायर की अपनी याचिका में कहा है कि चूंकि इस मामले की जांच के लिए सरकार पहले ही एक उच्च स्तरीय समिति गठित कर चुकी है, इसलिए एसआईटी गठित करने का फ़ैसला क़ानूनी रूप से उचित नहीं है.

सरकार ने मांग की है कि एसआईटी गठित किए जाने के सुप्रीम कोर्ट के फ़ैसले को वापस लिया जाना चाहिए.

इस बीच राष्ट्रपति प्रतिभा देवी सिंह पाटिल ने कहा है कि काले धन की समस्या से निपटने के लिए राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर लड़ने की ज़रूरत है.

उन्होंने कहा, “काले धन के मुद्दे को संबोधित करने के लिए राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर क़दम उठाए जाने चाहिए. टैक्स से जुड़ी जानकारी बांटने के लिए देशों के बीच आपसी सहयोग होना चाहिए, ताकि टैक्स चोरी करने वालों को कहीं पनाह न मिले.”

'घेरे में कांग्रेस'

चार जून को सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को ये भी आदेश दिया था कि वो उन लोगों के नाम सार्वजनिक करे जिनके ख़िलाफ़ विदेशी बैंक में काला धन जमा कराने के लिए क़ानूनी नोटिस जारी किया गया है.

कोर्ट ने आशंका जताई थी कि काले धन का इस्तेमाल ग़ैर-क़ानूनी गतिविधियों के लिए हो रहा है.

इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को फटकार लगाई थी और कहा था कि विदेशों में जमा भारतीयों का कालाधन राष्ट्रीय संपत्ति की लूट है.

सुप्रीम कोर्ट के इस फ़ैसले को केंद्र सरकार के लिए बड़ा झटका माना गया था.

प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने साल के शुरुआत में कहा था कि सरकार विदेशी खातों की जानकारी को सार्वजनिक नहीं कर सकती क्योंकि सरकार कई अंतरराष्ट्रीय समझौतों से बंधी हुई है.

वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी का तर्क है कि सरकार को विदेशी बैंकों में जमा काले धन की जानकारी अंतरराष्ट्रीय समझौतों के अंतर्गत मिली है, और अगर सरकार इस जानकारी को सार्वजनिक करती है तो भविष्य में कोई भी विदेशी सरकार भारत को ऐसी जानकारी नहीं देगी.

विपक्षी राजनीतिक दल भारतीय जनता पार्टी ने तो सरकार पर ये आरोप तक लगाए हैं कि वो विदेशी बैंकों में जमा भारतीय काले धन को देश वापस लौटाना ही नहीं चाहती है.

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