'दूसरी हरित क्रांति की ज़रूरत'

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Image caption प्रधानमंत्री ने कहा है कि भविष्य में अन्न की बढती मांग देखते हुए दूसरी हरित क्रांति की ज़रूरत है

प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने कहा है कि देश में वर्ष 2010-11 में अन्न का रेकॉर्ड 241 मिलियन टन उत्पादन हुआ, लेकिन भविष्य में अन्न की बढती मांग देखते हुए दूसरी हरित क्रांति की ज़रूरत है.

प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने कहा कि महत्वपूर्ण फसलों का उत्पादन बीते वर्ष में रेकार्ड स्तर तक पहुँच गया है.

गेहूँ, मक्का औऱ दालों के बेहतर उत्पादन की वजह से 2010-11 के दौरान 241 मिलियन टन का उत्पादन हुआ.

प्रधानमंत्री ने भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के एक समारोह में भाषण देते हुए कहा कि तिलहन उत्पादन में भी रेकार्ड वृद्धि हुई है.

मनमोहन सिंह ने किसानों औऱ वैज्ञानिकों के प्रयासों की भरपूर सराहना करते हुए कहा कि उनकी वजह से ही ये संभव हो पाया है.

अनाज की ज़रूरत

मनमोहन सिंह ने ज़ोर देकर कहा कि देश को खाद्य क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने के लिए एक दूसरी हरित क्रांति की ज़रूरत है.

मनमोहन सिंह ने कहा कि 2020-21 तक भारत को 281 मिलियन टन अनाज की ज़रूरत होगी औऱ इसके लिए भारत को कृषि क्षेत्र में उत्पादन को दो फ़ीसदी प्रतिवर्ष के हिसाब से और बढ़ाना होगा.

मनमोहन सिंह ने बताया कि भारत कृषि क्षेत्र में सकल घरेलू उत्पाद का 0.6 फ़ीसदी शोध औऱ विकास के लिए खर्च करता है लेकिन इसे 2020 तक दो से तीन गुना तक बढ़ाना होगा.

उधर सरकार ने चार साल पुराने गेहूँ के निर्यात पर से प्रतिबंध उठाने का फ़ैसला किया है.

वर्ष 2007 में बढती महंगाई को देखते हुए गेहूँ के निर्यात पर प्रतिबंध लगा दिया गया था.

हालांकि कृषि मंत्री शरद पवार ने पत्रकारों को बताया है कि अभी निर्यात किए जाने वाले गेहूँ की मात्रा पर फ़ैसला नहीं हुआ है.

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