तेलंगाना के कांग्रेसी सोनिया से नाराज़

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Image caption तेलंगाना के कांग्रेसी नेताओं की संचालन समिति की बैठक हुई

आंध्र प्रदेश में तेलंगाना राज्य की मांग को लेकर सत्तारूढ़ कांग्रेस पार्टी दो धड़ों में बट गई है और तेलंगाना के कांग्रेसी अब पार्टी आला कमान से टकराव के रास्ते पर चल पड़े हैं.

पार्टी के केंद्रीय नेतृत्व के ख़िलाफ़ खुली बग़ावत करते हुई तेलंगाना के कांग्रेसी नेताओं की संचालन समिति ने पार्टी महासचिव ग़ुलाम नबी आज़ाद के दिल्ली आने के निमंत्रण को ठुकरा दिया है.

संचालन समिति के सदस्य आज़ाद से इसलिए नाराज़ हैं क्योंकि उन्होने चीन यात्रा के दौरान तेलंगाना विरोधी बयान दिए और कहा कि जब तक आंध्र प्रदेश विधान सभा सर्वसम्मति से प्रस्ताव पारित नहीं करती तेलंगाना राज्य बनाने के लिए एक इंच भी आगे बढ़ना संभव नहीं है.

संचालन समिति के अध्यक्ष के केशव राव ने कहा कि तेलंगाना के कांग्रेसी नेता तभी दिल्ली जाएंगे अगर पार्टी आला कमान तेलंगाना राज्य की घोषणा करेगा.

एक और मंत्री के वेंकट रेड्डी ने कहा,"अगर हम एक जुट रहे तो स्वयं सोनिया गांधी विशेष विमान से हैदराबाद आएंगी और तेलंगाना की घोषणा करेंगी".

भेदभाव की शिकायत

तेलंगाना के ही एक और कांग्रेसी विधायक राज्या ने कहा कि आंध्र और रायल सीमा क्षेत्रों के नेताओं को तो चिदंबरम, प्रणब मुखर्जी और प्रधानमंत्री से मिलने का समय दिया जा रहा है जबकि उन्हे आज़ाद से मिलने के लिए बुलाया जा रहा है जिनका कोई महत्व ही नहीं.

तेलंगाना के कांग्रेसी नेताओं ने ऐसे समय अपना रुख़ कड़ा किया है जब आंध्र और रायल सीमा क्षेत्रों के कांग्रेसी नेता दिल्ली में जमा हैं.

इनमें सांसद, मंत्री, विधायक और दूसरे नेता शामिल हैं.

ये लोग कांग्रेस के केंद्रीय नेतृत्व पर ये दबाव डालने गए हैं कि वो तेलंगाना की मांग स्वीकार न करे और आंध्र प्रदेश के टुकड़े न होने दे क्योंकि ऐसा करने से देश में और कई राज्यों की मांग उठ खड़ी होगी.

उनका यह भी कहना है कि सरकार श्रीकृष्ण समिति की रिपोर्ट में की गई उस सिफ़ारिश को स्वीकार करे जिसमें आंध्र प्रदेश की अखंडता को बनाए रखने पर ज़ोर दिया गया है.

आंध्र के एक सांसद के सम्बसिवा राव ने कहा कि वो संयुक्त आंध्र प्रदेश के सिवा कोई और बात नहीं करेंगे और आला कमान से कहेंगे कि वे जल्दी से जल्दी इस समस्या को हल करें.

अध्यापकों की हड़ताल

इधर तेलंगाना के एक लाख सत्तर हज़ार अध्यापकों ने अलग राज्य के समर्थन में हड़ताल पर जाने का नोटिस दिया है.

अध्यापकों की 25 यूनियनों के प्रतिनिधियों ने सोमवार को मुख्य सचिव एस वी प्रसाद से भेंट की और उन्हें यह नोटिस दिया.

अध्यापकों ने कहा है कि अगर पहली अगस्त से पहले केंद्र सरकार तेलंगाना राज्य की घोषणा नहीं करती तो वो हड़ताल कर देंगे.

इससे पहले तेलंगाना के सरकारी कर्मचारी भी ऐसे ही नोटिस दे चुके हैं.

ऐसा लगता है कि आंध्र प्रदेश सरकार राजनीतिक मोर्चे के अलावा प्रशासनिक क्षेत्र में भी एक बड़े संकट की ओर बढ़ रही है.

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