भारत में 'सबसे बड़ा' यूरेनियम भंडार

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आंध्र प्रदेश में कडप्पा ज़िले के तुम्मलपल्ली में डेढ़ लाख टन यूरेनियम का भंडार होने की संभावना पर सरकारी स्तर पर तो ख़ुशी जताई गई है मगर इस बात को लेकर भी आशंकाएँ हैं कि वहाँ उपलब्ध यूरेनियम का कितना इस्तेमाल हो पाएगा.

विज्ञान और प्रौद्योगिकी पर पैनी नज़र रखने वाले पत्रकार पल्लव बागला का कहना है कि भंडारों का मिलना तो अच्छी बात है लेकिन इसमें गहराई तक जाने की भी ज़रूरत है.

उनके मुताबिक, "भारत में जो भंडार हैं उनमें यूरेनियम की मात्रा बहुत कम है. ऐसे में उसमें से यूरेनियम निकालना काफ़ी मुशिकल होगा. वहीं अभी स्पष्ट नहीं है कि तुम्मलपल्ली में कितना प्रतिशत यूरेनियम है और कितना आसानी से निकलेगा. दूसरी बात ये है कि ये यूरेनियम जंगल की ज़मीन के नीचे है."

ऐसे में पर्यावरण के मसलों को देखते हुए इस यूरेनियम को निकालना आसान नहीं होगा.

भारतीय परमाणु ऊर्जा आयोग के प्रमुख एस बनर्जी ने सोमवार को दावा किया था कि आंध्र प्रदेश में मिला ये भंडार दुनिया का सबसे बड़ा यूरेनियम का भंडार हो सकता है.

बनर्जी के मुताबिक़ अध्ययन बताते हैं कि कडप्पा ज़िले के तुम्मलपल्ली में डेढ़ लाख टन यूरेनियम है.

रणनीति

विश्लेषकों के अनुसार खनिज के जो नए भंडार पाए गए हैं वह भारत की बढ़ती परमाणु ऊर्जा ज़रूरतों तो पूरा करने के लिए काफ़ी नहीं है.

तो ऐसे में सवाल ये भी उठाए जा रहे हैं कि तुम्मलपल्ली में पहले से ही 15 हज़ार टन यूरेनियम होने का अनुमान था ऐसे में अचानक इस घोषणा का क्या मकसद हो सकता है

पल्लव बागला इसका जवाब देते हुए कहते हैं कि कहीं न कहीं इसका संबंध अमरीका की विदेश मंत्री हिलेरी क्लिंटन की यात्रा से जु़डा़ हुआ हो सकता है.

वह कहते है, "भारत ये संकेत देना चाहता है कि उसके पास भी यूरेनियम है, वह अपनी तकनीक से भी रिएक्टर बना सकता है और भारत अपना परमाणु कार्यक्रम आगे बढ़ा सकता है."

बनर्जी के अनुसार तुम्मलपल्ली में किए गए अध्ययन ये पुष्टि करते हैं कि वहाँ 49,000 टन का भंडार है और हाल ही में किए गए सर्वेक्षण ये संकेत देते हैं कि ये आँकड़ा तीन गुना बढ़ भी सकता है और ये दुनिया में यूरेनियम का सबसे बड़ा भंडार भी हो सकता है.

उनका ने बताया कि यूरेनियम का ये भंडार 35 किलोमीटर के इलाक़े में फैला हुआ है और अब भी इलाके में खोज जारी है.

बनर्जी के मुताबिक़ ये नई खोज एक बड़ा कदम है लेकिन भारत को जितनी परमाणु ऊर्जा की ज़रूरत है उसकी तुलना में ये भंडार बहुत कम है.

भारत की अगले कुछ सालों में 30 रिएक्टर लगाने की योजना है और इस परमाणु उर्जा से उसे 2050 तक एक चौथाई बिजली मिल पाएगी.

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