ज़मीन आबंटन मामले में फिर हंगामा

Image caption मंहगी ज़मीन सस्ते दाम में आबंटित करने के मामले ने तूल पकड़ा

बिहार में कुछ ख़ास मंत्रियों और अधिकारियों के सगे संबंधियों को सस्ते में महंगे भूखंड आबंटित किये जाने का मामला राज्य विधानसभा में दूसरे दिन भी हंगामे का कारण बना रहा.

विपक्षी सदस्यों ने इस कथित ज़मीन घोटाले की जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) से कराये जाने की मांग लेकर सदन में देर तक नारेबाज़ी की.

जब मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने इस मांग पर असहमति ज़ाहिर की तो विरोध में लगभग सभी विपक्षी सदस्यों ने सदन की कार्यवाही का बहिष्कार कर दिया.

विरोधी दल के नेता अब्दुल बारी सिद्दीक़ी ने कहा, '' मुख्यमंत्री ने इस मामले की जांच राज्य के मुख्यसचिव से कराने का जो ऐलान किया है, वह ज़मीन की बंदरबाँट पर लीपापोती की चालाकी भरी कोशिश है.''

उन्होने कहा कि इसी तरह शराब-घोटाले के मामले में नीतीश कुमार ने मुख्यसचिव से मनमाफ़िक रिपोर्ट लेकर अपने उस काबीना मंत्री को ही हटा दिया था, जिसने कुछ ख़ास अधिकारियों को घोटाले में लिप्त बताया था.

उधर बिहार औद्योगिक क्षेत्र विकास प्राधिकार ( बिआडा) के भूखंड आबंटन में भ्रष्टाचार का आरोप लगने से नीतीश सरकार इन दिनों बचाव की मुद्रा में काफ़ी परेशान दिखने लगी है.

मुख्यमंत्री विशेषरूप से इसलिए सवालों के घेरे में हैं क्योंकि उनके बेहद क़रीबी कहे जाने वाले दो मंत्री, पी.के. साही और परवीन अमान्नुल्लाह और तीन आईएस अधिकारी, अफ़ज़ल अमानुल्लाह, सिद्धार्थ और आनंद किशोर इस कथित घपले के दायरे में हैं.

इनमें से किन्ही की बेटी तो किन्ही के बेटे या अन्य निकट संबंधी को बिआडा के बड़े-बड़े और क़ीमती भूखंड बाज़ार दर से बहुत कम क़ीमत पर दिये जाने का ब्योरा प्रकाश में आया है.

ज़ाहिर है कि इसी कारण विपक्ष को नीतीश कुमार पर उंगली उठाने का एक और मौक़ा हाथ लग गया है.

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