'बिहार में करोड़ों की अनियमितताएं'

नितीश कुमार

भारत के नियंत्रक महालेखा परीक्षक यानी सीएजी ने बिहार के सरकारी विभागों से संबंधित अपनी ताज़ा ऑडिट रिपोर्ट में कई गंभीर अनियमितताओं की बात कही है.

बेवजह ख़र्च, ग़लत भुगतान, कर लगाने और वसूलने में गड़बड़ी समेत राजस्व हानि के अनेक मामलों में कुल मिलाकर लगभग 24 अरब रूपए का नुक़सान बताया गया है.

बिहार के प्रधान महालेखाकार प्रेमन दिनाराज ने वित्तीय वर्ष 2009-10 की अंकेक्षण रिपोर्ट जारी करते हुए कहा, ''सिर्फ़ 2092 मामलों की जाँच में 2399.68 करोड़ रूपए की हानि का पता चला है. इसलिए समझा जा सकता है कि सरकारी महकमे के लचर वित्तीय प्रबंधन से राज्य को कितना बड़ा नुक़सान हो रहा है.''

रिपोर्ट के मुताबिक़ वाणिज्य कर विभाग के टैक्स आकलन में त्रुटि से 610 करोड़ रूपए, शराब की दुकानों की बंदोबस्ती में गड़बड़ी से 134 करोड़ रूपए और इसी तरह अन्य अनियमितताओं के कारण अरबों रूपए का घाटा हुआ है.

महालेखाकार आइडीएस धारीवाल ने इस मौक़े पर बताया, ''राज्य के सरकारी खज़ाने से विभिन्न मदों में ख़र्च के लिए 'ए.सी बिल' के ज़रिए निकाले गए 15 हज़ार करोड़ रूपए के व्यय का अधिकृत ब्यौरा 'डीसी बिल' के रूप में अभी तक प्राप्त नहीं हुआ है. साथ ही जो 11 हज़ार करोड़ रूपए ख़र्च का 'डीसी बिल' सौंपा गया है, उनमें से मात्र 64 करोड़ रूपए के ही वाउचर सही और एडजस्टमेंट के लायक हैं."

घेरे में सरकार

गौ़रतलब है कि इसी 'एसी-डीसी बिल' वाले 11 हज़ार करोड़ रूपए के कथित घोटाले को लेकर नीतीश सरकार के ख़िलाफ़ पटना हाईकोर्ट में दर्ज मामला सुर्ख़ियों में आया था.

यह मामला वर्ष 2002 से लेकर वर्ष 2009 तक सरकारी ख़ज़ाने से निकाले और ख़र्च किए गए रूपए का हिसाब सीएजी को समय पर नहीं दिए जाने से संबंधित है.

ताज़ा प्रतिवेदन यानी रिपोर्ट में सीएजी ने राज्य के स्कूलों और विभिन्न ज़िलों में छात्र-छात्राओं के लिए खुले कंप्यूटर केंद्रों की दुर्दशा पर आंकड़ों के साथ गंभीर टिप्पणियां की हैं.

कहा गया है कि जिन 241 माध्यमिक स्कूलों के नमूनों की जांच हुई, उनमें से दो तिहाई स्कूलों में शौचालय, प्रयोगशाला, पुस्तकालय और पढ़ने के कमरे तक नहीं थे.

दस ज़िलों में खुले 549 कंप्यूटर केंद्रों के बारे में बताया गया है कि कुछ कंप्यूटर तो चोर ले गए, कुछ अधिकारी उठा कर ले गए और जो बच गए, वो ख़राब हालत में पड़े हुए हैं.

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