अब पुलिसबल में भर्ती होंगे एसपीओ

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छत्तीसगढ़ की सरकार ने नक्सल प्रभावित बस्तर संभाग में पुलिस कि नियुक्तियों में स्थानीय युवक और युवतियों की योग्यता में विशेष छूट देने का फ़ैसला किया है.

यह फ़ैसला शुक्रवार को राज्य मंत्रिमंडल की बैठक में लिया गया है. इस फ़ैसले के साथ ही 5000 विशेष पुलिस अधिकारियों (एसपीओ) के पुलिस बल में शामिल होने का रास्ता साफ़ हो गया है.

मंत्रिमंडल की बैठक के बाद मुख्यमंत्री रमन सिंह ने कहा कि अब बस्तर के इलाक़े में रहने वाले पांचवीं क्लास पास युवक-युवतियों को पुलिस बल में बहाल किया जाएगा.

शैक्षणिक योग्यता के अलावा उन्हें शारीरिक योग्यता में भी छूट दी जाएगी. इसके अलावा नक्सल प्रभावित बस्तर और सरगुजा संभाग में सरकारी नौकरियों की तृतीय और चतुर्थ वर्गीय नौकरियों में भी स्थानीय युवकों को प्राथमिकता दी जाएगी.

हाल ही में सुप्रीम कोर्ट ने छत्तीसगढ़ में विशेष पुलिस अधिकारियों की नियुक्ति और उन्हें हथियार दिए जाने पर सवाल उठाते हुए इसे असंवैधानिक करार दिया था.

सुप्रीम कोर्ट ने न केवल एसपीओ की नियुक्ति को असंवैधानिक बताया है बल्कि सलवा जुड़ूम को बंद करने का भी निर्देश दिया था.

छत्तीसगढ़ सरकार का कहना था कि इस फ़ैसले से राज्य में चल रहे नक्सल विरोधी अभियान को बड़ा झटका लगा है क्योंकि एसपीओ स्थानीय युवक हैं जो नक्सल हिंसा के पीड़ित भी हैं.

तर्क

सरकार का तर्क रहा है कि ये युवक स्थानीय भाषा जानते है और यह भी जानते हैं कि कौन माओवादी है या फिर उनके समर्थक. नक्सल विरोधी अभियान में लगाए गए अर्धसैनिक बलों की अगुआई भी एसपीओ ही करते रहे हैं क्योंकि वे बस्तर के जंगलों और बीहड़ों से वाकिफ़ हैं.

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Image caption सरकार का तर्क है कि एसपीओ नक्सल प्रभावित इलाक़ों को अच्छी तरह जानते हैं

सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद 4800 एसपीओ के हथियार जमा कर उन्हें कैंम्पों में वापस बुला लिया गया है. बुधवार को मुख्यमंत्री रमन सिंह नें केंद्रीय गृह मंत्री पी चिदंबरम से मुलाक़ात की और सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अलोक में एसपीओ और सलवा जुडूम के मुद्दे पर उनसे चर्चा की.

छत्तीसगढ़ सरकार ने वर्ष 2007 में एक क़ानून के ज़रिए 18 से 25 वर्ष के आदिवासी युवकों को हथियार देकर उन्हें विशेष पुलिस अधिकारी यानी एसपीओ का दर्जा देने का प्रावधान किया था.

इन एसपीओ की नियुक्ति ज़िला पुलिस अधीक्षक (एसपी) बिना किसी प्रक्रिया के कर सकते हैं. उन्हें प्रति माह तीन हज़ार रुपए दिए जाते हैं जिसकी 80 प्रतिशत राशि केंद्र की ओर से दी जाती है.

इस समय छत्तीसगढ़ में क़रीब 4,800 एसपीओ हैं, जिनमें से 90 प्रतिशत की तैनाती दक्षिण छत्तीसगढ़ के बस्तर में है, जहाँ नक्सली गतिविधियाँ सबसे अधिक हैं.

पुलिस अधिकारियों का कहना है कि एसपीओ को योग्यता के आधार पर पुलिस बल में नियुक्त किया जाता रहा है. लेकिन इनमें से ज़्यादातर बहुत कम पढ़े लिखे आदिवासी युवक और युवतियां हैं. इसलिए राज्य कैबिनेट ने तय किया कि बस्तर के इलाक़े में पुलिस बल में भर्ती में स्थानीय युवक-युवतियों को छूट दी जाएगी.

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