फ़ाई के पीछे थी एफ़बीआई

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Image caption फ़ाई कहते रहे हैं कि उनका आईएसआई से कोई लेना-देना नहीं है.

अमरीकी जाँच एजेंसी एफ़बीआई की मानें, तो कश्मीरी लॉबिस्ट गुलाम नबी फ़ाई उनकी निगाह में कई सालों से थे.

अमरीका की एक अदालत में एफ़बीआई की ओर से पेश की गई आपराधिक शिकायत के मुताबिक एफ़बीआई के एजेंटों ने फ़ाई से उनके आईएसआई से कथित रिश्तों के बारे में पहली बार 22 मार्च 2007 को सवाल किए थे.

फ़ाई ने आरोपों का खंडन करते हुए कहा था कि आईएसआई से जुड़े किसी व्यक्ति से उनका संपर्क नहीं रहा है. उन्होंने ये भी कहा कि उन्हें अमरीका में आईएसआई की मौजूदगी के बारे में पता नहीं है और उन्हें लगता भी है कि आईएसआई की अमरीका में उपस्थिति नहीं है.

22 मार्च 2010 में अमरीका के डिपार्टमेंट ऑफ़ जस्टिस (डीओजे) ने फ़ाई को लिखी चिट्ठी में भारतीय मीडिया में आई खबरों का ज़िक्र किया जिसमें फ़ाई पर पाकिस्तान के कथित तौर पर एजेंट होने के आरोप लगाए गए थे.

डीओजे ने फ़ाई से कहा कि उन्हें स्थानीय कानून के मुताबिक एक विदेशी एजेंट के तौर पर रजिस्टर होने की ज़रूरत है. अपने जवाब में फ़ाई ने कहा कि कश्मीरी अमेरिकन एसोसिएशन लॉबिंग नहीं, बल्कि जन संपर्क कर रहा है.

डिपार्टमेंट ऑफ़ जस्टिस को भेजे एक दूसरे जवाब में कहा कि उन्होंने कभी भी पाकिस्तान सरकार के लिए काम नहीं किया है.

तीन मार्च 2011 को एफ़बीआई के एजेंटों ने एक बार फिर फ़ाई से बातचीत की. उनसे पूछा गया कि क्या वो पाकिस्तान सरकार में किसी को जानते हैं. इस पर फ़ाई ने कहा कि वो जानते तो हैं, लेकिन उनकी पाकिस्तान सरकार में किसी के साथ कोई रिश्ता नहीं है.

पाकिस्तानी टेलीफ़ोन नंबर

आरोपपत्र में पाकिस्तान के कुछ टेलीफ़ोन नंबरों का भी ज़िक्र है.

उनमें से एक नाम जावेद अज़ीज़ ख़ान है. एफ़बीआई के मुताबिक उन्हें राठौर, अब्दुल्ला और निज़ामी मीर के नाम से भी जाना जाता है.

उनके एक टेलीफ़ोन नंबर पर जब हमने फ़ोन किया तो दूसरी तरफ़ से एक बच्चे की आवाज़ सुनाई दी.

उसने अपना नाम अहमद बताया, और ये भी कि उसकी उम्र 11 साल है. उसने बताया कि उसके पिता कर्नल शौकत ज़हूर अब्बास आईएसआई में काम करते हैं और अभी दफ़्तर गए हैं.

इस दूसरे इस्लामाबाद के नंबर पर फ़ोन करने पर आलिया नाम की महिला ने फ़ोन उठाया. उन्होंने बताया कि उनके पति अमजद अली शेर और वो विदेश विभाग में डायरेक्टर जनरल अफ़्रीका के पद पर कार्यरत हैं.

आलिया ने भी कहा कि वो जावेद को नहीं जानती और उनके पति का आईएसआई से कोई ताल्लुक नहीं है.

आलिया आश्चर्यचकित थीं कि उनका फ़ोन नंबर एफ़बीआई के दस्तावेज़ में कैसे आया क्योंकि उन्हें ये नंबर करीब आठ महीने पहले ही मिला है.

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