तेलंगाना बंद का व्यापक असर

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आंध्र प्रदेश में अलग तेलंगाना राज्य के समर्थकों के तेलंगाना बंद की वजह से हैदराबाद सहित पूरे तेलंगाना क्षेत्र में दुकानें, व्यापारिक संस्थान और स्कूल-कॉलेज बंद रहे और आम जीवन अस्तव्यस्त हो गया.

बंद की वजह से बस सेवाएँ रद्द करनी पड़ीं और परिवहन निगम की छह हज़ार बसें बाहर नहीं निकल सकीं. उस्मानिया, काकतीय और पल्मुरु विश्वविद्यालयों की कई परिक्षाओं को भी रद्द कर देना पड़ा.

तेलंगाना समर्थकों ने जगह-जगह सड़कों पर बाधाएं खड़ी कीं, प्रदर्शन किए और उन राजनेताओं के पुतले जलाए जो तेलंगाना राज्य का विरोध कर रहे हैं. तेलंगाना संयुक्त संघर्ष समिति ने इस बंद का आह्वान किया था.

कामकाज प्रभावित

समिति के संयोजक प्रोफ़ेसर कोदंडा राम ने कहा कि जिस तरह आंध्र प्रदेश सरकार ने तेलंगाना के लिए दिल्ली में आत्महत्या करने वाले यादी रेड्डी के अंतिम संस्कार को रोकने की कोशिश की और हड़ताल पर जाने वाले सरकारी कर्मचारियों को धमकियां दीं उनके विरोध में इस बंद का आह्वान किया गया था.

तीन सप्ताह के भीतर ये दूसरी बार था जब तेलंगाना में अलग राज्य के पक्ष में बंद किया गया. शुक्रवार की हड़ताल में सचिवालय के नॉन गजटेड यानी ग़ैर राजपत्रित कर्मचारी भी शामिल रहे जिससे वहां के कामकाज पर असर पड़ा.

दुसरे कार्यालयों में भी कर्मचारियों की उपस्थिति कम ही रही.

बसें न चलने और ऑटो रिक्शा के हड़ताल में शामिल रहने से सड़कें वीरान थीं.

प्रशासन ने किसी भी गड़बड़ी को रोकने के लिए पुलिस और अर्ध सैनिक बलों को तैनात किया था.

अंतिम संस्कार

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Image caption यादि रेड्डी के अंतिम संस्कार में बड़ी संख्या में लोग शामिल हुए

इस बीच तेलंगाना के जिस युवा यादी रेड्डी ने दो दिन पहले दिल्ली में आत्महत्या कर ली थी उनका अंतिम संस्कार शुक्रवार को हैदराबाद के निकट उनके गाँव मोइनाबाद में किया गया.

इस अवसर पर पुलिस ने कड़े सुरक्षा प्रबंध किए थे. यादी रेड्डी ने तेलंगाना राज्य की स्थापना में केंद्र सरकार की ओर से किए जा रहे विलम्ब के विरुद्ध आत्महत्या कर ली थी.

उनका शव गुरुवार की रात विमान से हैदराबाद लाया गया था.

लेकिन उसे जुलूस की शक्ल में तेलंगाना शहीद समरक तक ले जाने के तेलंगाना समर्थकों के प्रयास को पुलिस ने असफल कर दिया.

पुलिस ने तेलंगाना समर्थक नेताओं के साथ साथ उन पत्रकारों को भी गिरफ्तार कर लिया था जो इसकी रिपोर्टिंग के लिए एयरपोर्ट पहुँचे थे.

शुक्रवार को कई बड़े राजनेताओं ने यादी रेड्डी के घर जाकर श्रद्धांजलि दी. इनमें तेलंगाना राष्ट्र समिति के सदस्य, तेलुगूदेसम के विधायक और भाजपा के नेता भी शामिल थे. उस्मानिया विश्वविद्यालय में भी छात्रों ने जुलूस निकाल कर यादी रेड्डी को श्रद्धांजलि दी और उसकी मृत्यु के लिए केंद्रीय मंत्री जयपाल रेड्डी को ज़िम्मेवार ठहराया क्योंकि उन्होंने तेलंगाना के लिए त्यागपत्र नहीं दिया है.

यादी रेड्डी का संबंध उसी चेवेल्ला लोकसभा क्षेत्र से है जिसका प्रतिनिधित्व जयपाल रेड्डी करते हैं. मुख्यमंत्री किरण कुमार रेड्डी और विपक्ष के नेता चंद्रबाबू नायडू ने भी यादी रेड्डी की मौत पर दुःख प्रकट किया है और युवाओं से अपील की है कि वे इस तरह का काम न करें.

विवाद

यादी रेड्डी की मृत्यु से एक बड़ा विवाद भी उठ खड़ा हुआ है.

गुरुवार को उनका शव दिल्ली के आंध्र प्रदेश भवन में लाने की अनुमति न दिए जाने पर टीआरएस के विधायक हरीश राव ने एक अधिकारी की पिटाई कर दी थी.

आज इस मामले ने जात-पात का रंग ले लिया क्योंकि जिस अधिकारी की पिटाई हुई थी वे दलित थे.

दलित संगठनों का आरोप है कि इससे टीआरएस के दलित-विरोधी होने का प्रमाण मिलता है.

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