'फ़ाई की गिरफ़्तारी का वार्ता पर असर नहीं'

हिना रब्बानी (फ़ाईल फ़ोटो) इमेज कॉपीरइट AFP Getty Images
Image caption विदेश मंत्री के रुप में हिना रब्बानी की ये पहली भारत यात्रा होगी

भारत सरकार के सूत्रों का कहना है कि 27 जुलाई से पाकिस्तान की नई विदेशमंत्री हिना रब्बानी खर की भारत यात्रा में दोनो देशों के लोगों के बीच संपर्क बढ़ाने के लिए महत्वपूर्ण घोषणाएँ हो सकती हैं.

सूत्रों ने दोहराया कि 26/11 के मुंबई हमलों की जाँच भी बातचीत के केंद्र में रहेगी.

हिना रब्बानी की यात्रा के कार्यक्रम को अभी अंतिम रूप नहीं दिया गया है, हालाँकि उन्होंने प्रधानमंत्री से मिलने की इच्छा ज़ाहिर की है.

26 जुलाई को दोनो देशों के विदेश सचिव भी मिल रहे हैं.

कई घोषणाओं की उम्मीद

दोनों विदेशमंत्रियों के बीच होने वाली बातचीत में वीज़ा मिलने के तरीकों को आसान बनाना, नियंत्रण रेखा के आर-पार होने वाले व्यापार को बढ़ावा देना, व्यापारियों के आने-जाने को आसान बनाना, उन्हें सुविधाएँ मुहैया करवाना, उनके बीच संचार माध्यमों को आसान बनाना जैसे कदम शामिल हैं.

सूत्रों के मुताबिक उन्हें उम्मीद है कि इस सभी बिंदुओं पर कुछ ठोस घोषणाएँ सामने आ पाएंगी.

26/11 मुंबई हमलों के बाद महीनों तक बातचीत रुकी होने के बाद एक बार फिर दोनो देशों के नेताओं के मिलने का सिलसिला शुरू हो गया है.

भारत और पाकिस्तान के पास अभी उन सामानों की लंबी सूची है जिनका व्यापार हो सकता है. सूत्रों के मुताबिक तरीके को आसान बनाने के लिए हिना रब्बानी की यात्रा के दौरान कोशिश होगी उन सामान की सूची बनाई जाए जिनका व्यापार नहीं हो सकता.

सूत्रों के मुताबिक एक तरीके से ये भारत को ‘मोस्ट-फ़ेवर्ड नेशन’ का दर्जा देने जैसा होगा, हालांकि इसे किसी और नाम से भी पुकारा जा सकता है.

सूत्रों का कहना था कि नियंत्रण रेखा पर व्यापार करने वाले व्यापारी बैंकिंग सुविधाओं की मांग करते रहे हैं, लेकिन पाकिस्तान इससे झिझक रहा है.

सरकारी सूत्रों का कहना था कि भारत और पाकिस्तान के बीच जो एक के बाद एक वार्ताओं का सिलसिला चल रहा है, ये दर्शाता है कि पाकिस्तान के साथ संवाद बेहतर हुआ है और तनाव कम हुआ है.

फ़ाई का संबंधों पर असर नहीं

सूत्रों के मुताबिक अमरीका में कश्मीरी लॉबिस्ट गुलाम नबी फ़ाई की गिरफ़्तारी का दोनो देशों के बीच होने वाली बातचीत पर कोई असर नहीं पड़ेगा.

"बातचीत दिल्ली में हो रही है, जबकि गिरफ़्तारी अमरीका में हुई है. हमें फा़ई की गतिविधियों के बारे में पता था. हमने इसे अमरीका के साथ उठाया भी था कि वो पृथकतावादी और चरमपंथी गतिविधियों में लिप्त हैं. इस गिरफ़्तारी से साफ़ है कि अब ऐसे गुटों का काम करना मुश्किल होता जा रहा है."

सूत्रों ने अमरीकी सरकार की कार्रवाई को महत्वपूर्ण बताया, और कहा कि ये सालों की मेहनत का फल है.

उनका कहना था, "हो सकता हो कि अमरीका का ये कदम अमरीका और पाकिस्तान के बीच मुश्किल रिश्तों की वजह से हो. ऐसे लोग लंदन और ब्रसल्स में भी हैं. अब सभी की नज़र उन पर होगी."

सूत्रों की माने तो फ़ाई की जाँच को लेकर भारतीय सरकार अमरीका की डिपार्टमेंट ऑफ़ जस्टिस के संपर्क में है.

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