'कृपया मुझे फ़ेल कर दें'

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Image caption हाईकोर्ट ने छात्रा की उत्तर पुस्तिका अदालत में पेश करने को कहा है

आमतौर पर लोग परीक्षा में फ़ेल हो जाने के बाद अदालत का रुख करते हैं लेकिन पश्चिम बंगाल की एक छात्रा ने सबको चौंका दिया जब उसने कलकत्ता हाईकोर्ट में याचिका दायर करके कहा कि उसे परीक्षा में ग़लत ढंग से पास कर दिया गया है और उसे फ़ेल कर दिया जाए.

छात्रा ने अपनी याचिका में कहा है, "मैंने गणित के सभी सवालों को लाल स्याही से रद्द कर दिया था इसीलिए मुझे शून्य मिलना चाहिए था फिर भी मुझे 54 नंबर मिल गए हैं. कृपया मुझे फ़ेल कर दें."

पश्चिम बंगाल के पूर्वी मिदनापुर जिले की मालविका माइती की अर्ज़ी पर सुनवाई करते हुए न्यायमूर्ति ज्योतिर्मय भट्टाचार्य ने हायर सेकेंडरी कौंसिल से उस छात्रा की उत्तर पुस्तिका को 17 अगस्त को अदालत में पेश करने का निर्देश दिया है.

'ठीक से जाँच नहीं हुई'

छात्रा की दलील है कि गणित की उत्तर पुस्तिकाओं की ठीक तरीक़े से जांच नहीं की गई है.

मालविका के वकील गौतम डे कहते हैं, "परीक्षा के दौरान मालविका ने छह या सात सवालों के जवाब लिखे जिसके बाद उसे महसूस हुआ कि उसे बढ़िया नंबर नहीं मिल सकते इसलिए उसने लाल स्याही से सभी सवालों को रद्द कर दिया."

डे का कहना है कि वह गणित में फ़ेल होना चाहती थी ताकि उसे अगले साल इस विषय की परीक्षा में शामिल होने का मौका मिल सके.

उसकी सोच थी कि वह वह अगले साल बेहतर तैयारी कर विषय में बढ़िया नंबर पा सकती है. इसलिए उसने सभी सवालों को लाल स्याही से रद्द कर दिया था.

डे कहते हैं, "अगर कोई छात्र किसी विषय में पास हो जाता है तो उसे अगले साल उस विषय की परीक्षा दोबारा देने का मौक़ा नहीं मिलता है. सिर्फ फ़ेल होने वालों को ही अगले साल परीक्षा देने की सुविधा उपलब्ध है. वो ये मौक़ा नहीं गँवाना चाहती थी."

पूर्वी मिदनापुर ज़िले में हरिपुर हाई स्कूल की छात्रा मालविका माइती ने इस साल बारहवीं के इम्तीहान दिए थे.

उसे बांग्ला में 64, अंग्रेजी में 61, केमिस्ट्री यानी रसायन में 60, गणित में 54, फ़िज़िक्स यानी भौतिकी में 58, बायोलॉजी यानी प्राणि विज्ञान में 54 और पर्यावरण विज्ञान में 76 नंबर मिले हैं.

मालविका ने सिर्फ़ गणित के पर्चे को लेकर याचिका दायर की है.

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