सुप्रीम कोर्ट से ही उम्मीद: हेगड़े

  • 23 जुलाई 2011
संतोष हेगड़े
Image caption लोकायुक्त ने कहा है कि उनके पास येदुरप्पा और दूसरे मंत्रियों के खिलाफ़ पुख़्ता सुबूत हैं

कर्नाटक के लोकायुक्त न्यायमूर्ति एन संतोष हेगड़े ने कहा है कि उन्हें इस बात पर संदेह है कि उनकी रिपोर्ट पर राज्य सरकार कार्रवाई करेगी.

उनका कहना है कि इस पर कार्रवाई के लिए उन्हें सिर्फ़ सुप्रीम कोर्ट से उम्मीद है.

एक साक्षात्कार में उन्होंने कहा, "सरकार इस पर कार्रवाई नहीं करेगी. मुझे सिर्फ़ सुप्रीम कोर्ट से उम्मीद है."

अभी लोकायुक्त ने अपनी रिपोर्ट सरकार को नहीं सौंपी है लेकिन लीक हुई रिपोर्ट के बाद न्यायमूर्ति हेगड़े ने कहा है कि उनके पास मुख्यमंत्री बीएस येदियुरप्पा के ख़िलाफ़ पर्याप्त और ठोस सबूत हैं.

लीक हुई रिपोर्ट के अनुसार उन्होंने मुख्यमंत्री के अलावा चार और मंत्रियों को खनन घोटाले के लिए दोषी ठहराया है जिसमें बेल्लारी के रेड्डी बंधु शामिल हैं.

राज्यपाल हंसराज भारद्वाज शुक्रवार को कह चुके हैं कि वे लोकायुक्त अधिनियम के अनुसार उस पर कार्रवाई करेंगे.

इस बीच कर्नाटक में सत्तारुढ़ भारतीय जनता पार्टी पर दबाव बढ़ा है कि वे अपने मुख्यमंत्री के ख़िलाफ़ कार्रवाई करें.

बाध्यकारी नहीं

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Image caption येदियुरप्पा कहते आए हैं कि वे निर्दोष हैं और अपना पद नहीं छोड़ेंगे

सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश न्यायमूर्ति हेगड़े का कहना है कि सुप्रीम कोर्ट ख़ुद कर्नाटक के खनन वाले इलाक़ों की निगरानी कर रही है और उसने कहा है कि सरकार को बेल्लारी में उत्खनन का कार्य रोक देना चाहिए.

उन्होंने कहा, "इसके अलावा मेरे पास बेल्लारी में चल रही अवैध गतिविधियों के सबूत हैं और मैंने इसे अपनी रिपोर्ट में शामिल किया है. मैं आश्वस्त हूँ कि उच्चतम न्यायालय की ओर से नियुक्त केंद्रीय अधिकारप्राप्त समिति (सीईसी) और उनका उद्देश्य एक ही है. वे मेरी रिपोर्ट लेकर उसे सुप्रीम कोर्ट में पेश कर सकते हैं."

उनका कहना है कि सुप्रीम कोर्ट की ओर से नियुक्त समिति होने के नाते सीईसी को उनकी रिपोर्ट हासिल करने के लिए सूचना के अधिकार का प्रयोग करने की भी ज़रुरत नहीं पड़ेगी और वे इसे सीधे हासिल कर सकते हैं.

मुख्यमंत्री के इस बयान पर कि वे अपने पद से इस्तीफ़ा नहीं देंगे, उन्होंने कहा कि वे इस पर आश्चर्यचकित नहीं हैं.

न्यायमूर्ति हेगड़े ने एक सवाल के जवाब में स्वीकार किया कि राज्य सरकार के लिए उनकी रिपोर्ट को स्वीकार करना बाध्यकारी नहीं है.

उन्होंने कहा, "लोकायुक्त की रिपोर्ट सिर्फ़ बता सकती है कि क्या हुआ और वो सिफ़ारिश कर सकती है इसके बारे में क्या किया जाना चाहिए, और जो भी जवाबदेह है या ज़िम्मेदार है उसे इस पर कार्रवाई करनी चाहिए."

उन्होंने कहा कि लोकायुक्त के पास ये अधिकार ज़रुर होता है कि यदि रिपोर्ट में किसी का नाम है तो वह उस पर मुक़दमा चलाए लेकिन ये पहले राज्य सरकार की ज़िम्मेदारी होती है कि वो इस पर कार्रवाई करे.

उनका कहना था, "यदि आपराधिक गतिविधियों और जवाबदेही को संज्ञान में लिया जाए तो हम उन पर मुक़दमा चला सकते हैं लेकिन ये अब आने वाले व्यक्ति (उनके उत्तराधिकारी) पर निर्भर करेगा."

उल्लेखनीय है कि न्यायमूर्ति हेगड़े दो अगस्त को सेवानिवृत्त हो रहे हैं.

सुरक्षा की चिंता

उन्होंने कहा कि वे उन पाँच अधिकारियों की सुरक्षा और उनके भविष्य को लेकर चिंता ज़ाहिर की जो लोकायुक्त के लिए काम करते रहे हैं और जिन्होंने उनकी रिपोर्ट के लिए जाँच का कार्य किया है.

उन्होंने कहा कि राज्य सरकार को इन अधिकारियों को 'विसल ब्लोवर्स'मानना चाहिए.

उन्होंने कहा, "मुझे सिर्फ़ उन पर हमले का डर नहीं है. मेरी आशंका इससे अधिक की है क्योंकि उनका पूरा करियर तबाह हो सकता है. उनके काम से बहुत से लोग चिढ़ चुके हैं...वे ताक़तवर लोग हैं...ऐसे लोग जो राजनीति में है और ऐसे लोग भी हैं जो उनके वरिष्ठ हैं...लेकिन सब कुछ सबूत पर निर्भर है. उन्होंने तो सिर्फ़ सूत्र दिए हैं उन सूत्रों को सुलझाया तो मैंने है."

उन्होंने वरिष्ठ वन अधिकारी यूवी सिंह पर हुए हमले का उदाहरण दिया जिन पर कुछ महीनों पहले बंगलौर के एक कॉर्पोरेटर ने उस समय हमला किया था जब वे प्रदूषित पानी बहाए जाने के आरोपों की जाँच कर रहे थे.

उनका कहना था कि अवैध खनन इससे कहीं अधिक गंभीर मामला है.

उन्होंने कहा कि वे सोमवार या मंगलवार को अपनी रिपोर्ट सौंप देंगे, लेकिन उन्होंने संकेत दिए कि इसमें थोड़ा विलंब भी हो सकता है.

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