मंत्रियों और गठबंधन पर डीएमके चुप

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Image caption करुणानिधि के उत्तराधिकारी चुने जाने की चर्चा काफ़ी दिनों से चल रही है

एक के बाद एक राजनीतिक झटके झेल रही द्रविड़ मुनेत्र कड़गम यानी डीएमके ने अपनी एक अहम बैठक के बाद कहा है कि एम करुणानिधि ही पार्टी के नेता बने रहेंगे.

जबकि केंद्रीय मंत्रिमंडल में ए राजा और दयानिधि मारन के इस्तीफ़े से खाली हुई जगह को भरने के बारे में कुछ नहीं कहा गया है.

डीएमके की आमसभा की बैठक से पहले कहा जा रहा था कि कुछ नेता कांग्रेस के साथ सात साल पुराने गठबंधन को जारी रखते हुए यूपीए में बने रहने के ख़िलाफ़ थे, लेकिन गठबंधन के मसले पर भी पार्टी ने अपने प्रस्ताव में चुप्पी साधे रखी है.

उल्लेखनीय है कि 2जी स्पेक्ट्रम घोटाले में पार्टी के नेता करुणानिधि की बेटी और राज्यसभा सांसद कनिमोड़ी और पूर्व दूरसंचार मंत्री ए राजा जेल में हैं और इसी मामले में दयानिधि मारन को मंत्री पद छोड़ना पड़ा है.

उधर राज्य विधानसभा के चुनाव में भी डीमएम को जयललिता की पार्टी ऑल इंडिया अन्ना द्रविड़ मुनेष कड़गम यानी एआईएडीएमके के हाथों क़रारी हार का सामना करना पड़ा है.

कनिमोड़ी और राजा का समर्थन

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Image caption कनिमोड़ी को सुप्रीम कोर्ट ने भी ज़मानत देने से इनकार कर दिया है

करुणानिधि की अध्यक्षता में हुई बैठक में पार्टी ने कनिमोड़ी, ए राजा और दयानिधि मारन के प्रति समर्थन व्यक्त किया है.

बैठक में सीबीआई पर आरोप लगाए गए कि केंद्रीय जाँच एजेंसी (सीबीआई) दुर्भावना और पूर्वाग्रह के साथ काम कर रही है और इसी वजह से उसने कनिमोड़ी की ज़मानत का विरोध किया है.

प्रस्ताव में कहा गया है कि कनिमोड़ी लंबे समय से जेल में हैं और ये न्याय के सिद्धांतों के ख़िलाफ़ है.

उम्मीद की जा रही थी कि इस बैठक में ए राजा और मारन के इस्तीफ़े से खाली हुई जगह पर नियुक्तियों पर चर्चा करेगी लेकिन इस पर पार्टी ने चुप्पी साध ली.

हाल ही में अपने मंत्रिमंडल का विस्तार करने के बाद प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने कहा था कि मंत्रिमंडल के दो पद डीएमके के लिए खाली रखे गए हैं. इसके बाद डीएमके नेता करुणानिधि ने कहा था कि इस पर फ़ैसला आमसभा की बैठक में होगा.

बैठक में पारित किए गए प्रस्ताव में द्रविड़ आंदोलन में करुणानिधि की भूमिका की सराहना करते हुए कहा है कि 'द्रविड़ आंदोलन करुणानिधि के नेतृत्व में जारी रहेगा'.

इस प्रस्ताव में करुणानिधि के इस नज़रिए की पुष्टि की गई है कि प्रधानमंत्री को भी लोकपाल के दायरे में लाया जाना चाहिए.

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