डीएमके के सामने यक्ष प्रश्न

  • 24 जुलाई 2011
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Image caption डीएमके विचार कर रही है कि कॉंग्रेस के साथ अपने बरसों पुराने गठबंधन को जारी रखे या नहीं.

तमिलनाडु के कोयमबतूर में रविवार को राज्य के मुख्य विपक्षी दल डीएमके की महत्वपूर्ण बैठक हो रही है जिसमें कॉंग्रेस के साथ गठबंधन के अलावा पार्टी के भविष्य को लेकर भी उठे सवालों के हल ढूँढने की कोशिश हो रही है.

डीएमके की यह महत्वपूर्ण बैठक ऐसे समय में हो रही है जब पार्टी अन्ना डीएमके प्रमुख और तमिलनाडु की मुख्यमंत्री जयललिता के तीख़े राजनीतिक प्रहारों के अलावा विपरीत अदालती आदेशों का भी सामना कर रही है.

राज्य में मुख्यमंत्री जयललिता की सरकार ने कई ऐसे मामलों की जाँच करना शुरू कर दिया है जिसमे डीएमके नेताओं और कार्यकर्ताओं के खिलाफ़ गंभीर आरोप हैं.

इसके अलावा पार्टी इस बात पर भी विचार कर रही है की कॉंग्रेस के साथ गठबंधन जारी रखा जाए या नहीं. जल्द ही राज्य में स्थानीय निकायों के चुनाव होने वाले हैं और यह चुनाव डीएमके के लिए बहुत ही ज़्यादा महत्वपूर्ण हैं.

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Image caption करूणानिधि को जयललिता से लड़ने के आलावा अपने बेटों के खेमों में संतुलन भी साधना है

राज्य स्थानीय निकायों के इन चुनावों में डीएमके की बुरी तरह पराजय का मतलब होगा राजनीतिक हाशिये पर जाने का ख़तरा उठाना. पार्टी इस बात पर भी विचार कर रही है कि क्या राज्य विधान सभा चुनावों की तरह स्थानीय निकायों के चुनाव भी कॉंग्रेस के साथ मिल कर लड़े जाएँ या फिर पार्टी अकेले लड़े.

आतंरिक खींचतान

इन सभी मुद्दों से इतर पार्टी के सामने नेतृत्व का प्रश्न भी खड़ा हुआ है. पार्टी के पितामह एम करूणानिधि के ऊपर अपने दो बेटों स्टालिन और अलागिरी के खेमों के बीच में संतुलन साधने की कोशिश भी कर रहे हैं.

स्टालिन के समर्थक पिछले कुछ समय से यह मांग कर रहे हैं कि अब उन्हें पार्टी के ज़िम्मेदारी सौंप कर करूणानिधि आराम करें वहीं उनके दूसरे बेटे और केंद्रीय मंत्री अलागिरी के समर्थक चाहते हैं कि करूणानिधि पद पर बने रहे ताकि अलागिरी के लिए पार्टी में प्रमुखता हासिल करने का रास्ता खुला रहे.

इन सब मुद्दों के आलावा डीएमके अगर केंद्र में यूपीए सरकार का हिस्सा बनना तय करती है तो उसे तय करना होगा की केंद्र में 2 जी घोटाले के चलते पदों से हटे कैबिनेट मंत्री ए राजा और दयानिधि मारन का स्थान कौन ले.

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