हाथ मिलाने की राजनीति

यासिर अराफ़ात और बेनज़ीर भुट्टो इमेज कॉपीरइट BBC World Service

जब पाकिस्तान की हसीन विदेश मंत्री हिना रब्बानी खर ने विदेश मंत्री एसएम कृष्णा से हाथ मिलाया, तो कई लोगों को सुखद आश्चर्य हुआ. लेकिन कई कट्टरपंथियों को उनकी यह अदा नागवार गुज़री.

पाकिस्तान में महिला राजनीतिज्ञों के पुरुषों से हाथ मिलाने को इस हद तक बुरी नज़र से देखा जाता है कि पाकिस्तान की पूर्व प्रधानमंत्री बेनज़ीर भुट्टो ने भी यह तय कर लिया कि वह किसी पुरुष से सार्वजनिक रूप से हाथ नहीं मिलाएंगी.

हालाँकि वह बहुत प्रगतिशील महिला थीं, लेकिन वह इस बात का भी ध्यान रखती थीं कि किसी बात से उनके देश में उनकी व्यक्तिगत छवि को नुक़सान न पहुँचे.

उन्होंने अपने चीफ़ ऑफ़ प्रोटोकोल अरशद समी ख़ाँ को निर्देश दिया कि हर जगह यह बता दिया जाए कि वह पुरुषों से हाथ नहीं मिलातीं. इस बात की नौबत न आए कि कोई पुरुष उनसे हाथ मिलाने के लिए आगे बढ़ाए और वह उसका हाथ मिलाने से इंकार कर दें.

एक बार जब फ़लस्तीनी नेता यासिर अराफ़ात कराची आ रहे थे, बेनज़ीर भुट्टो उनकी अगवानी करने के लिए हवाई अड्डे पहुँची हुई थीं. अराफ़ात बेनज़ीर के पिता ज़ुल्फ़िकार अली भुट्टो के नज़दीकी दोस्त थे और बेनज़ीर को अपनी पुत्री की तरह मानते थे.

शुक्रिया

लेकिन इसके बावजूद उन्होंने अपने चीफ़ ऑफ़ प्रोटोकोल से कहा कि अराफ़ात को पहले से बता दिया जाए कि वह उनसे हाथ नहीं मिलाएंगी.

इमेज कॉपीरइट AFP
Image caption हिना ने बेझिझक कृष्णा से हाथ मिलाया

अरशद समी ख़ां जब अराफ़ात को रिसीव करने हवाई जहाज़ के ऊपर पहुँचे तो उन्होंने उन्हें यह बात बता दी. अराफ़ात ने उनको यह याद दिलाने के लिए शुक्रिया अदा किया और कहा कि उन्हें यह बात पहले भी कई बार बताई जा चुकी है.

लेकिन जैसे ही अराफ़ात विमान से उतरे, उन्होंने आव देखा न ताव और तपाक से बेनज़ीर की तरफ़ अपना हाथ बढ़ा दिया. बेनज़ीर ने ग़ुस्से से अरशद समी ख़ाँ की तरफ़ देखा और बहुत झिझकते हुए अपनी शॉल से हाथ बाहर निकाल कर अराफ़ात से मिलाया.

जब अरशद समी ख़ाँ, यासिर अराफ़ात और बेनज़ीर गार्ड ऑफ़ ऑनर के लिए बढ़ रहे थे तो बेनज़ीर ने जानबूझ कर उर्दू में अरशद समी ख़ां से कहा, "क्या आपने उन्हें बताया नहीं था कि मैं पुरुषों से हाथ नहीं मिलाया करती."

इससे पहले कि समी ख़ाँ कुछ बोल पाते अराफ़ात ने मुस्कराते हुए कहा, "मैडम आप बहुत भाग्यशाली हैं कि मैंने आप का चुंबन नहीं लिया. अरब देशों में यह प्रथा है कि जब हम किसी से मिलते हैं तो गर्मजोशी का इज़हार करने के लिए उसके दोनों गालों का चुंबन लेते हैं."

अराफ़ात का यह कहना था कि बेनज़ीर ने ज़ोर का ठहाका लगाया और बात आई गई हो गई लेकिन अरशद समी ख़ाँ ने अपने संपर्कों का इस्तेमाल कर यह सुनिश्चत ज़रूर किया कि बेनज़ीर के अराफ़ात से हाथ मिलाने का वह दृश्य न तो किसी अख़बार में छपे और न ही किसी टेलीविज़न चैनल पर दिखाया जाए.

संबंधित समाचार