पाकिस्तान में लोगों की सोच बदली है: हिना रब्बानी

  • 28 जुलाई 2011
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Image caption एक साल के बाद विदेशमंत्री स्तरीय बातचीत हो रही है.

पाकिस्तान की विदेश मंत्री हिना रब्बानी ने कहा है कि भारत और पाकिस्तान की नई पीढ़ी दोनों देशों के बीच एक नए रिश्ते को देखेगी.

बुधवार को दिल्ली के हैदराबाद हाउस में दोनों विदेश मंत्रियों की बैठक की समाप्ति के बाद पत्रकारों को संबोधित करते हुए हिना रब्बानी ने कहा कि उनके भारतीय समकक्ष एसएम कृष्णा से उनकी मुलाक़ात भारत और पाकिस्तान के द्विपक्षीय संबंधों में एक नए युग की शुरूआत है.

हिना रब्बानी ने कहा, ''भारत-पाकिस्तान की नई पीढ़ी दोनों देशों के बीच ऐसे संबंधों को देखेगी जो उससे अलग होगी जो हमने पहले देखी है.''

हिना के अनुसार ज़रूरत इस बात की है कि दोनो देशों के बीच बातचीत बाधारहित रहे.

संयुक्त बयान के केंद्र में एलओसी

उन्होंने कहा, ''दोनो देशों ने माना है कि बातचीत की प्रक्रिया जारी रहनी चाहिए और इसके अलावा कोई चारा नहीं है. इस इलाक़े में शांति क़ायम रखने के लिए पाकिस्तान और भारत की विशेष ज़िम्मेदारी है.''

रब्बानी ने कहा कि पाकिस्तान में लोगों की सोच बदली है.

'फ़ासलों को तय करना है'

उधर भारतीय विदेश मंत्री एसएम कृष्णा ने कहा कि दोनों देश इस बात के लिए प्रतिबद्ध हैं कि सभी आपसी मामलों को सुलझा लिया जाए, हालाँकि उन्होंने माना कि ‘फ़ासलों को तय करना है.’

उन्होंने कहा कि दोनो देशों ने माना कि आतंकवाद लगातार ख़तरा बना हुआ है और इसे हटाने के लिए कोशिशें होनी चाहिए और जो लोग इससे निपटने के लिए ज़िम्मेदार हैं, उनके ख़िलाफ़ कार्रवाई होनी चाहिए.

जम्मू और कश्मीर मुद्दे पर एसएम कृष्णा ने कहा कि दोनो देश इस बारे में बातचीत जारी रखेंगे ताकि ‘दूरीयाँ कम हों और नज़दीकियाँ बढें’.

उन्होंने कश्मीर को बांटने वाली रेखा एलओसी के दोनों ओर रहने वाले लोगों के बीच व्यापार बढ़ाने के लिए कई क़दमों को उठाने की बात भी कही.

कृष्णा के अनुसार दोनो देशों के बीच व्यापार बढा़ने के लिए भारत-पाकिस्तान संयुक्त आयोग के दोबारा शुरुआत का भी फ़ैसला लिया गया है.

एसएम कृष्णा ने जानकारी दी कि दोनो देशों के विदेश मंत्री अगले साल की पहली छमाही में इस्लामाबाद में मिलेंगे ताकि बातचीत प्रक्रिया की समीक्षा हो सके.

इससे पहले शांति प्रक्रिया में जान फूँकने के उद्देश्य से भारतीय विदेश मंत्री एसएम कृष्णा और पाकिस्तान की युवा महिला विदेश मंत्री हिना रब्बानी खर के बीच दिल्ली के हैदराबाद हाउस में सुबह 11 बजे बातचीत शुरू हुई.

बातचीत शुरू होने से ठीक पहले पत्रकारों से बात करते हुए एसएम कृष्णा ने कहा कि भारत पाकिस्तान के साथ मिलकर काम करना चाहता है.

कृष्णा ने कहा, ''न केवल दोनों देशों के लिए बल्कि पूरे क्षेत्र में शांति के लिए ज़रूरी है कि भारत और पाकिस्तान साथ मिलकर काम करें.''

इस मौक़े पर हिना रब्बानी ने कहा कि वे भारत के साथ एक रचनात्मक और सकारात्मक बातचीत की आशा करती हैं.

हिना रब्बानी ने कहा कि पाकिस्तान भारत को एक अहम पड़ोसी मानते हुए उसके साथ मैत्रीपूर्ण संबंध चाहता है. उन्होंने कहा कि उन्हें इस बात का एहसास है कि दोनों देशों के कंधों पर कितनी बड़ी ज़िम्मेदारी है.

उनके अनुसार दोनों देशों की ज़्यादातर चुनौतियाँ एक जैसी हैं.

विदेश मंत्रियों की बैठक के बाद विदेश सचिवों ने एक संयुक्त संवाददाता सम्मेलन को संबोधित किया.

कश्मीर की समस्या पर पूछे गए एक सवाल के जवाब में पाकिस्तानी विदेश सचिव सलमान बशीर ने कहा, ''कई जटिल समस्याओं का कोई आसान और सीधा हल नहीं होता है. एक दूसरे से बातचीत कर, एक दूसरे को समझकर और एक दूसरे में विश्वास बढ़ाकर ही हम इस तरह के मुद्दों के हल की ओर बढ़ते है.''

भारतीय विदेश सचिव निरूपमा राव ने कहा कि दोनों देशो के बीच संबंधों को सुधारने के लिए राजनीतिक ईच्छा शक्ति है.

राव का कहना था, ''मुझे यक़ीन है कि दोनों देशों के बीच नए रिश्ते क़ायम करने की राजनीतिक ईच्छा शक्ति है.हमें अभी बहुत काम करना है लेकिन हमलोग आगे बढ़ने के लिए कटिबद्घ हैं.''

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Image caption एस एम कृष्णा से पहले पाकिस्तानी विदेश मंत्री ने वरिष्ठ भाजपा नेता लाल कृष्ण आडवाणी से भी मुलाक़ात की.

पाकिस्तानी विदेश मंत्री की मंगलवार को हुर्रियत नेताओं से हुई मुलाक़ात के बारे में पूछे गए एक सवाल के जवाब में पाकिस्तानी विदेश सचिव ने कहा कि इसको ज़्यादा अहमियत नहीं देनी चाहिए.

निरूपमा राव ने कहा कि मुंबई हमलों के लिए ज़िम्मेदार लोगों को जल्द से जल्द सज़ा दिलाने की मांग को भारत ने एक दफ़ा फिर पाकिस्तान के सामने रखा है.

निरुपमा राव ने ये भी कहा कि समझ़ौता ट्रेन में हुए धमाके की जांच जैसी ही पूरी हो जाएगी, भारत इसकी रिपोर्ट पाकिस्तान को सौंप देगा.

मुंबई में 2008 में हुए हमलों के बाद दोनों देशों के बीच काफ़ी तनाव आ गया था और संबंधों पर जमी बर्फ़ धीरे-धीरे ही पिघलनी शुरू हुई है.

मगर माना जा रहा है कि दोनों देशों के बीच मौजूद अविश्वास को कम करने में ये एक अहम क़दम साबित हो सकता है.

मंगलवार को भारत पहुँचने के बाद पाकिस्तानी विदेश मंत्री ने ज़ोर देकर कहा था कि दोनों देशों को इतिहास से सबक़ लेना चाहिए हालाँकि इतिहास के बोझ तले दबना नहीं चाहिए.

पिछले कई महीनों से पाकिस्तानी विदेश राज्य मंत्री का पद सँभाल रही रब्बानी को इस बैठक से कुछ ही दिन पहले ही केंद्रीय विदेश मंत्री का पद दिया गया था और उसके बाद भारत का दौरा उनकी पहली विदेश यात्रा है.

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