'मध्यप्रदेश गान' अनिवार्य करने पर विवाद

  • 27 जुलाई 2011
शिवराज सिंह चौहान
Image caption सरकार ने कहा है कि वह सिर्फ़ प्रदेश की संस्कृति का प्रचार कर रही है

मध्यप्रदेश के गान पर राज्य के राजनीतिक दल और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने 'मध्यप्रदेश गान' के गाने को अनिवार्य बनाए जाने के फ़ैसले पर सवाल उठाते हुए कहा है कि जब राष्ट्रीय गान और राष्ट्र गीत गाए जाते हैं तो फिर अलग से मध्यप्रदेश गान की क्या ज़रुरत है.

जबकि सरकार का कहना है कि 'मध्यप्रदेश गान' राज्य की संस्कृति के बारे में इसलिए इसे गाने पर कोई आपत्ति नहीं होनी चाहिए.

राज्य की भारतीय जनता पार्टी सरकार ने गत आठ जुलाई को एक अध्यादेश जारी करके सभी शासकीय आयोजनों और स्कूल-कॉलेजों में 'मध्यप्रदेश गान'को गाना अनिवार्य कर दिया था.

ये है वो मध्यप्रदेश गान जिसे लेकर आपत्ति जताई जा रही है...

"सुख का दाता सब का साथी शुभ का यह संदेश है, माँ की गोद, पिता का आश्रय मेरा मध्यप्रदेश है.

विंध्याचल सा भाल नर्मदा का जल जिसके पास है, यहां ज्ञान विज्ञान कला का लिखा गया इतिहास है.

उर्वर भूमि, सघन वन, रत्न, सम्पदा जहां अशेष है,

स्वर-सौरभ-सुषमा से मंडित मेरा मध्यप्रदेश है.

सुख का दाता सब का साथी शुभ का यह संदेश है,

माँ की गोद, पिता का आश्रय मेरा मध्यप्रदेश है.

चंबल की कल-कल से गुंजित कथा तान, बलिदान की,

खजुराहो में कथा कला की, चित्रकूट में राम की.

भीमबैठका आदिकला का पत्थर पर अभिषेक है,

अमृत कुंड अमरकंटक में, ऐसा मध्यप्रदेश है.

क्षिप्रा में अमृत घट छलका मिला कृष्ण को ज्ञान यहां,

महाकाल को तिलक लगाने मिला हमें वरदान यहां,

कविता, न्याय, वीरता, गायन, सब कुछ यहां विषेश है,

ह्रदय देश का है यह, मैं इसका, मेरा मध्यप्रदेश है.

सुख का दाता सब का साथी शुभ का यह संदेश है,

माँ की गोद, पिता का आश्रय मेरा मध्यप्रदेश है."

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