तेल पर भारत दूसरे देशों के संपर्क में

  • 28 जुलाई 2011
ईरान तेल
Image caption ईरान के तेल के लिए भारत को करीब पाँच अरब डॉलर देने हैं, और इस बारे में दोनो देशों के बीच बातचीत जारी है

भारत के तेल और पेट्रोलियम मामलों के राज्य मंत्री आरपीएन सिंह ने बीबीसी को बताया है कि ईरान से तेल आपूर्ति बंद होने के खतरे को देखते हुए भारत ने तेल के लिए दूसरे देशों से संपर्क किया है, हालाँकि उन्होंने इस बारे में कुछ और कहने से मना कर दिया.

उन्होंने कहा, “हमने कुछ देशों से बात की है, लेकिन इस बारे में हम प्रेस को नहीं बताएँगे.”

भारत और ईरान के बीच पहली अगस्त के बाद से कच्चे तेल के व्यापार पर सवालिया निशान लग गया है क्योंकि सवाल ये है कि ईरान को तेल की कीमत कैसे अदा की जाए. ईरान ने कहा कि अगर उसे तेल की कीमत नहीं दी गई तो वो भारत को तेल की आपूर्ति रोक दी जाएगी.

आरपीएन सिंह ने कहा, “ईरान ने कहा कि अगर भारत कीमत नहीं चुकाता तो तेल की आपूर्ति रोक दी जाएगी, लेकिन जहाँ तक मेरी जानकारी है कि इस बारे में ईरान की ओर से कोई आधिकारिक सूचना नहीं दी गई है.”

आरपीएन सिंह ने बताया कि ईरान के तेल के लिए भारत को करीब पाँच अरब डॉलर देने हैं, और इस बारे में दोनो देशों के बीच बातचीत जारी है.

उधर रिपोर्टों की माने तो सऊदी अरब ने अगस्त में भारत की विभिन्न कंपनियों को ईरान के बदले तेल बेचने की पेशकश की है. एजेंसी पीटीआई के मुताबिक सऊदी अरब की राष्ट्रीय तेल कंपनी सऊदी अराम्को एसार ऑयल, भारत पेट्रोलियम औऱ हिंदुस्तान पेट्रोलियम को एक मिलियन बैरल तेल आपूर्ति करेगी.

लेकिन इससे भी भारत की तेल ज़रूरतें पूरी नहीं होतीं.

भारत अपने तेल आयात का 13 फ़ीसदी ईरान से ख़रीदता है.

आरपीएन सिंह ने कहा कि भारत की पूरी कोशिश होगी कि तेल की आपूर्ति जारी रहे.

एशियन क्लियरिंग यूनियन

गौरतलब है कि भारतीय रिज़र्व बैंक ने ईरान के साथ तेल के व्यापार पर एशिया क्लियरिंग यूनियन (एसीयू) सिस्टम के अंतर्गत लेन-देन पर रोक लगा दी थी.

माना जा रहा है कि ऐसा अमरीका के दबाव में किया गया क्योंकि अमरीका और दूसरे कुछ देशों को शक़ है कि ईरान तेल से मिले धन का इस्तेमाल परमाणु हथियारों के कार्यक्रम में करता है.

एशिया क्लियरिंग यूनियन का मुख्यालय तेहरान में है और वर्ष 1974 में स्थापित ये वो प्रणाली है जिसके तहत सदस्य देश आयात-निर्यात के लिए आसान शर्तों पर कारोबार कर सकते हैं.

इससे पहले ख़बर आई थी कि भारत और ईरान के केंद्रीय बैंकों के बीच कच्चे तेल के व्यापार के लिए यूरो मुद्रा के इस्तेमाल के लिए समझौता हो गया और भारत ईरान को कच्चे तेल की कीमत जर्मनी के एक बैंक के ज़रिए मुहैया करवाएगा, लेकिन इस ख़बर की पुष्टि नहीं हो पाई.

उधर भारतीय कंपनियों ने उम्मीद ज़ाहिर की है कि तेल की आपूर्ति में कोई विघ्न नहीं आएगा.

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