माजरा क्या है

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Image caption येदीयुरप्पा ने जब से शासन संभाला है उन्हें मुश्किलों का सामना करना पड़ा है

कर्नाटक के मुख्यमंत्री बीएस येदियुरप्पा को आख़िरकार जाना पड़ रहा है.

खान और अवैध खनन से जुड़े भ्रष्टाचार के मुद्दे पर वो कई महीनों से विपक्ष और सुप्रीम कोर्ट के निशाने पर थे लेकिन अब लोकायुक्त की रिपोर्ट के बाद उनके पास कोई रास्ता नहीं बचा है.

असल में इस पूरे मामले की जड़ बेल्लारी प्रांत है जहां बड़ी मात्रा में खनिजों की खान हैं और वहां अवैध खनन व्यापक पैमाने पर होता रहा है.

येदियुरप्पा जब से मुख्यमंत्री बने हैं अवैध खनन और उससे जुड़े रेड्डी बंधुओं का साया उनका पीछा नहीं छोड़ रहा है.

बेल्लारी में अधिकतर खान रेड्डी बंधुओं की कंपनियों के हाथ में है और रेड्डी बंधुओं में से एक के पास खनन मंत्रालय भी.

रेड्डी बंधु और विवाद

रेड्डी बंधु तीन भाई हैं. जर्नादन रेड्डी, करुणाकर रेड्डी और सोमशेखर रेड्डी.

करुणाकर रेड्डी बेल्लारी से सांसद हैं जबकि जनार्दन विधायक हैं और येदियुरप्पा सरकार में खनन मंत्रालय भी उन्हीं के पास है.

बेल्लारी के रेड्डी बंधु उस दौरान चर्चा में आए जब सुषमा स्वराज ने सोनिया गांधी के ख़िलाफ बेल्लारी से पर्चा भरा था. सुषमा हार गईं लेकिन रेड्डी बंधुओं ने सुषमा स्वराज के लिए काफ़ी काम किया था.

बाद में रेड्डी बंधु बीजेपी में आए और जब बीजेपी सत्ता में आई तो उन्हें मंत्रालय भी मिले.

वर्ष 2009 में जब येदियुरप्पा ने रेड्डी बंधुओं के अवैध खनन के ख़िलाफ़ कार्रवाई की कोशिश की तो इन लोगों ने बगावत का बिगुल बजा दिया और बात दिल्ली तक पहुंची.

इस बगावत के दौरान कई विधायक रेड्डी बंधुओं के साथ चले गए थे और सरकार अल्पमत में आ गई थी.

मामला किसी तरह शांत हुआ लेकिन ख़त्म नहीं हुआ. अवैध खनन के मामले में मुख्यमंत्री की तरफ से कार्रवाई नहीं होने के कारण पूर्व में लोकायुक्त भी पद से इस्तीफ़ा दे चुके हैं. हालांकि उन्हें बीजेपी के वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी ने इस्तीफ़ा वापस लेने के लिए मना लिया था.

अब लोकायुक्त ने अपनी रिपोर्ट में अवैध खनन का विस्तृत ब्यौरा देते हुए इसमें व्यापक भ्रष्टाचार की बात कही है. अवैध खनन का मामला सुप्रीम कोर्ट में भी है और कोर्ट ने भी रेड्डी बंधुओं पर कड़ी टिप्पणियां की हैं.

लोकायुक्त की रिपोर्ट में न केवल मुख्यमंत्री का नाम है बल्कि रेड्डी बंधुओं समेत कई अधिकारियों के भी नाम है और अवैध खनन से हुए नुक़सान का अनुमान 16 हज़ार करोड़ रुपए तक का लगाया गया है.

येदियुरप्पा बीजेपी में ही नहीं संघ के भी प्रिय माने जाते रहे हैं लेकिन इस बार खान और अवैध खनन के मुद्दे उन पर भारी पड़ गए हैं.

प्रेक्षकों का कहना है कि राष्ट्रीय राजनीति के बदलते परिदृश्य ने भी येदियुरप्पा पर कार्रवाई में भूमिका निभाई है क्योंकि भ्रष्टाचार पर कांग्रेस को घेर रही बीजेपी के पास नैतिक रुप से नंबर बढ़ाने का यह अच्छा रास्ता दिखता है.

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