क़साब ने लगाई सुप्रीम कोर्ट में गुहार

क़साब
Image caption सुप्रीम कोर्ट में क़साब का पक्ष रखने के लिए एक वकील की ज़रुरत होगी

मुंबई में 26 नवंबर के हमलों के दोषी पाए गए अजमल क़साब ने शुक्रवार को फांसी की सज़ा के खिलाफ़ सुप्रीम कोर्ट में अर्ज़ी दाखिल की है.

महाराष्ट्र के बॉम्बे हाई कोर्ट ने इस साल फ़रवरी में क़साब की मौत की सज़ा को बरक़रार रखा था.

इससे पहले निचली अदालत ने क़साब को यह सज़ा सुनाई थी.

शुक्रवार को क़साब ने इस मामले में जेल अधिकारियों की मदद से एक अर्ज़ी दाखिल करते हुए फ़ांसी की सज़ा रद्द किए जाने की अपील की है.

पिछले साल सज़ा सुनाए जाने के बाद से अब तक क़साब के पास कोई वकील नहीं है.

अब सुप्रीम कोर्ट इस पर अपना फ़ैसला करेगा.

सुप्रीम कोर्ट के फ़ैसले के बाद अजमल क़साब के पास राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल से रहम की अपील करने का एक अवसर बचा रहेगा.

वर्ष 2008 में मुंबई में कई जगह हुए हमलों के बाद एकमात्र हमलावर के रुप में पकड़े गए अजमल आमिर क़साब को ‘बहुत से लोगों को मारने’ का दोषी क़रार दिया गया है.

इन हमलों में 166 लोग मारे गए थे जबकि 250 से अधिक घायल हुए थे.

'क्रूरता और बर्बरता'

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Image caption मुंबई के हमलों के बाद भारत और पाकिस्तान के रिश्तों में तनाव बढ़ गया था

कोर्ट ने क़साब और अबू इस्माइल को पुलिस अधिकारियों करकरे, सलास्कर और कामटे की हत्याओं की ज़िम्मेदार मानते हुए अत्यधिक क्रूरता और बर्बरता का दोषी माना था.

फैसला सुनाते हुए अदालत ने कहा था कि इन हमलों में मासूम बच्चों और महिलाओं की भी जानें गईं और हमलावरों ने अत्यधिक क्रूरता का सुबूत दिया.

अदालत का कहना था कि 66 हत्याओं के दोषी क़साब ने न तो अपनी इस हरकत पर अफ़सोस ज़ाहिर किया और न ही पश्चाताप का कोई आभास दिया.

अदालत ने साल तीन मई 2010 को जब कसाब और अन्य लोगों को दोषी ठहराया था तो पाकिस्तान में इसकी तीखी प्रतिक्रिया हुई थी.

भारत का कहना था कि ये सभी हमलावर पाकिस्तानी थे लेकिन पाकिस्तान ने ना-नुकुर के बाद सिर्फ़ क़साब को अपना नागरिक स्वीकार किया.

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