माओवादियों की धमकी, संगठन गोलबंद

Image caption छत्तीसगढ़ के अलावा झारखंड और बिहार में नक्सली अत्यंत सक्रिय हैं.

माओवादियों ने अर्थशास्त्री ज्यां द्रेज के अलावा कुछ सामजिक कार्यकर्ताओं को धमकी दी है जिसके बाद मानवाधिकार के लिए काम कर रहे संगठनों नें माओवादियों के ख़िलाफ़ गोलबंद होना शुरू कर दिया है.

संगठनों नें माओवादियों के इस क़दम की निंदा करते हुए कहा है कि वो इस तरह की धमकी को फ़ौरन वापस लें.

माओवादियों ने अचानक जनसंगठनों के प्रति इस तरह का रवैय्या अपनाया है जिससे मानवाधिकार संगठन सकते में हैं.

ज्यां द्रेज के अलावा माओवादियों नें अरुणा रॉय और झारखण्ड के दो सामजिक कार्यकर्ता नन्दलाल सिंह और गोकुल बसंत के खिलाफ भी धमकी भरे पर्चे और पोस्टर जारी किए हैं.

माओवादियों के पोस्टर में ज्यां द्रेज सहित उन सभी कार्यकर्ताओं को जन अदालत में सजा देने की बात कही है जिन लोगों ने मनरेगा कार्यकर्ता नियामत अंसारी की हत्या का विरोध किया है.

अंसारी की हत्या दो मार्च को लातेहार के मनिका में हुई थी. उन्हें पीट पीट कर मार दिया गया था. अंसारी ग्रामीण रोज़गार गारंटी योजना में फैले भ्रष्टाचार के खिलाफ संघर्ष कर रहे थे.

नियामत अंसारी और ज्यां द्रेज के आवेदन पर एक प्रखंड विकास अधिकारी के पास से दो लाख रूपए की रक़म बरामद की गयी.

बाद में माओवादियों नें हत्या की ज़िम्मेदारी लेते हुए अंसारी पर ही भ्रष्टाचार का आरोप लगाया.

पोस्टरों में कहा गया है, "नियामत की मौत तो एक झांकी है. ग्राम स्वराज अभियान के चमचों का सफाया अभी बाकी है."

नियामत अंसारी, भोजन के अधिकार के लिए काम कर रहे संगठन ग्राम स्वराज अभियान से जुड़े हुए थे और उनकी हत्या और माओवादियों द्वारा लगाए गए आरोप की जांच पीपल्स यूनियन फार सिविल लिबर्टीज़ (पीयुसीएल) के नन्दलाल सिंह और गोकुल बसंत ने की तो माओवादियों नें उनके खिलाफ भी धमकी जारी कर दी है.

दरअसल जांच कर रहे कार्यकर्ताओं ने पाया कि मनरेगा के तहत लातेहार जिले में काफी गड़बड़ियाँ होती आ रहीं हैं और माओवादियों द्वारा नियामत अंसारी के खिलाफ लगाए गए आरोप बेबुनियाद हैं.

पीपल्स यूनियन फार डेमोक्रेटिक राईट्स (पीयूडीआर) ने भी इस पूरे प्रकरण की निंदा करते हुए कहा है कि माओवादियों का इस तरह का आचरण अस्वीकार्य है.

संगठन के हरीश धवन और परमजीत सिंह द्वारा जारी किए गए एक बयान में कहा गया है कि माओवादी ना सिर्फ सामाजिक कार्यकर्ताओं को दी गयी धमकी वापस लें बल्कि वह इस बात का भी आदर करें कि लोगों को अपने हिसाब से संगठन बनाने का पूरा अधिकार है.

वहीँ पीयूसीएल के शशिभूषण पाठक का कहना है कि उनकी तरफ से भी माओवादियों से अपील जारी की गयी है कि वह अपनी धमकी वापस लें.

पाठक का कहना है कि पीयूसीएल ने भी नियामत अंसारी की हत्या की जांच की है.

यह जांच गोकुल बसंत और नन्दलाल की दो सदस्य समिति ने की है. अब इन दोनों को माओवादियों ने धमकी दी है.

पाठक को लगता है कि किसी ग़लत फहमी की वजह से माओवादियों नें इस तरह की धमकी दी है. मगर वह कहते हैं कि अगर माओवादियों का यही रवैय्या रहा तो झारखण्ड में किसी भी सामाजिक संगठन का काम करना मुश्किल हो जाएगा.

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