समलैंगिक विद्यार्थियों के नए 'साथी'

  • 4 अगस्त 2011
समलैंगिक
Image caption भारत में समलैंगिक शादी को क़ानूनी मान्यता नहीं मिली है.

मुंबई के प्रतिष्ठित भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) में समलैंगिक विद्यार्थियों की मदद के लिए ‘साथी’ नामक एक समूह की स्थापना की गयी है.

यह अपने आप में पहली ऐसी संस्था होगी जिसका उद्देश्य है समलैंगिक विद्यार्थियों को हर तरह की मदद पहुँचाना ताकि वो एक सामान्य जीवन बिता सकें.

भारत में समलैंगिक होना एक कलंक के रुप में देखा जाता है, लेकिन समलैंगिकों का समर्थन करने वालों की संख्या भी बढ़ती जा रही है.

‘आईआईटी बॉम्बे’ के कुछ विद्यार्थियों ने ऐसे ही कुछ लोगों की सहायता से, ‘साथी’ नामक इस समूह की स्थापना की है.

जिसका मकसद लोगों में समलैंगिकों के प्रति गलतफहमियों को दूर करना है और उन्हें सामान्य जीवन बिताने में मदद करना है.

अस्तित्व की तलाश

आईआईटी की मुख्य प्रवक्ता जया जोशी कहती हैं, "आईआईटी के विद्यार्थियों ने इस बात को महसूस किया कि जब समलैंगिक इस दौर से गुज़रते हैं, यौन-व्यवहार को लेकर अपनी पहचान बना रहे होते हैं तो उनके लिए यह महसूस करना ज़रुरी है कि वो दूसरों की तरह सामान्य है. उनका समलैंगिक होना उनके लिए कोई अभिशाप नहीं हैं. वो समाज में वही जगह रखते हैं जो एक आम आदमी रखता है और लोगों को इस सच्चाई से रूबरू कराना है कि समलैंगिकता कोई बीमारी नहीं है.''

जया कहती हैं कि ‘साथी’ अपने आप में समलैंगिकों के लिए भारत के किसी भी शिक्षण संस्थान में पहली ऐसी संस्था होगी.

समूह के मुताबिक आईआईटी कैंपस में 10 फीसदी यानि लगभग सौ विद्यार्थी समलैंगिक हैं.

साथी की स्थापना करने वाले विद्यार्थियों में से एक रश्मि चौधरी का कहना है, "साथी का उद्देश्य समलैंगिकों को उनकी पहचान दिलाना और उनके अस्तित्व की तलाश में मदद करना है. समलैंगिकों को समाज में स्वीकार किया जाना ज़रुरी है ताकि वो अपनी पहचान के साथ भी उस समाज का हिस्सा बन सकें जिसमें वो रहते आए हैं.

रश्मि कहती हैं कि साथी उन सभी का स्वागत करता है जो समाज में बदलाव लाना चाहते हैं और उस बदलाव के साथ रहना चाहते हैं

भारत में समलैंगिकों की कई संस्थाएं हैं जो उनके खिलाफ़ बने कानूनों को ख़त्म करने के लिए सरकार के खिलाफ लड़ रही हैं.

सुप्रीम कोर्ट में इस सिलसिले में एक मुकदमा भी चल रह है जिसपर फैसला आना अभी बाकि है

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