कौन हैं सदानंद गौड़ा

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Image caption सदानंद की छवी ऐसे नेता की है जिसके संबंध आम तौर पर लोगों से अच्छे हैं

मृदुभाषी, सदा मुस्कुराने वाले, सदा टकराव टालने वाले सदानंद गौड़ा की सबसे बड़ी ताक़त उनका स्वाभाव माना जाता है.

राज्य की भाजपा सरकार के नए मुखिया चुने जाने के लिए के लिए उन्होंने भाजपा के भारी भरकम नेता और राष्ट्रीय महासचिव अनंत कुमार के समर्थन वाले राज्य विधान सभा में पूर्व नेता प्रतिपक्ष जगदीश शेट्टार को गुप्त मतदान में हराया.

किसी ज़माने में कांग्रेस नेता और पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की लोक सभा सीट रहे चिकमंगलूर लोकसभा क्षेत्र से सदानंद भाजपा संसद हैं.

प्रशासनिक अनुभव की कमी

साल 1953 में जन्मे गौड़ा का राजनीतिक सफ़र कोई बहुत स्वर्णिम नहीं है. वो कर्नाटक विधानसभा में केवल दो बार विधायक रहे हैं और सांसद के रूप में उनका लोकसभा में यह दूसरा कार्यकाल है.

उनकी तुलना में राज्य के मुख्यमंत्री पद के एक बड़े दावेदार और भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव अनंत कुमार पांच बार लोक सभा चुनाव जीत चुके हैं और केंद्रीय मंत्री भी रह चुके हैं.

मुख्यमंत्री बनने के लिए गौड़ा ने भाजपा के दूसरे बड़े नेता जगदीश शेट्टार को परास्त किया है. शेट्टार 1999 और 2004 के बीच में राज्य विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष थे और गौड़ा उनके कनिष्ठ उपनेता.

किसान आंदोलनों के ज़रिये राजनीति में उतरे गौड़ा यूँ तो क़ानून से स्नातक हैं और 1979 से 1982 तक वो कनिष्ठ सरकारी वकील भी रह चुके हैं लेकिन वो अपने पेशे को किसान ही बताते हैं.

हालाँकि वो इसके पहले एक बार और सांसद रह चुके हैं और दो बार विधायक भी बन चुके हैं. प्रशासन में कर्नाटक का मुख्यमंत्री पद किसी प्रशासनिक पद पर यह उनकी पहली पारी होगी.

ज़मीनी कार्यकर्ता

बिलकुल ज़मीन से ऊपर उठे सदानंद गौड़ा वोक्कालिंगा समुदाय से ताल्लुक रखते हैं. किसान आंदोलन के ज़रिए राजनीति में ऊपर उठे सदानंद गौड़ा ने अपना राजनीतिक सफ़र अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद की ज़िला इकाई के महासचिव के रूप में शुरू किया.

वर्ष 1994 में पहली बार विधायक बने सदानंद गौड़ा को खोखो और टेनिस खेलना पसंद है लेकिन उनकी खास रूचि है यक्षगान. यक्षगान गायन की एक पारंपरिक गायन प्रथा.

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