बेल्लारी में आंशिक खनन की अनुमति

  • 5 अगस्त 2011
खनन
Image caption खनन सिर्फ़ सरकारी कंपनी एनएमडीसी करेगी

सुप्रीम कोर्ट ने कर्नाटर के बेल्लारी ज़िले में सरकारी कंपनी एनएमडीसी को आंशिक खनन की अनुमति दी है ताकि लौह अयस्क का उत्पाद किया जा सके. ये खनन सिर्फ़ दो खानों में किए जाएँगे.

मुख्य न्यायाधीश एसएच कपाड़िया की अगुआई में एक ख़ास खंडपीठ ने अपने फ़ैसले में कहा, "हमारा ये विचार है कि विशेष परिस्थिति में एनएमडीसी को दो खानों में खनन की अनुमति दी जाए. ताकि शनिवार से प्रति महीने 10 लाख टन लौह अयस्क का उत्पाद बढ़ाया जा सके."

खंडपीठ ने खनन से निजी कंपनियों को अलग रखा है और ये भी स्पष्ट किया है कि खनन के बाद निकाले गए लौह अयस्कों का निर्यात भी नहीं किया जाएगा.

सुप्रीम कोर्ट ने ये भी कहा कि कर्नाटक सरकार इन लौह अयस्कों के मौजूदा बाज़ार मूल्य पर 10 फ़ीसदी की दर से राजस्व उगाहेगी.

योजना

जजों ने कर्नाटक सरकार से ये भी कहा है कि वो तीन महीने के अंदर बेल्लारी ज़िले में खनन के कारण विस्थापित हुए लोगों के दावे और पुनर्वास की योजना पेश करे.

कुछ दिनों पहले सुप्रीम कोर्ट बेल्लारी ज़िले में खनन और खनिज की ढुलाई पर रोक लगा दी थी

कर्नाटक में खनन में भारी भ्रष्टाचार पर लोकायुक्त संतोष हेगड़े की रिपोर्ट के बाद बीएस येदुरप्पा को मुख्यमंत्री पद से इस्तीफ़ा देना पड़ा था.

राज्यपाल और राज्य सरकार को सौंपी अपनी रिपोर्ट में लोकायुक्त संतोष हेगड़े ने चार सालों में राजस्व को 16,000 करोड़ से ज़्यादा के नुकसान का ब्योरा दिया था.

उन्होंने अपनी रिपोर्ट में मुख्यमंत्री येदुरप्पा के अलावा रेड्डी बंधुओं और जेडीएस नेता और पूर्व मुख्यमंत्री रहे कुमारास्वामी का भी नाम लिया था.

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