फ़िटनेस टेस्ट में पाँच सिपाहियों की मौत

Image caption नए नियमों के तहत सब इंस्पेक्टर बनने के लिए पुरुषों को सवा घंटे में दस किलोमीटर की दौड़ लगाना अनिवार्य है.

सब इंस्पेक्टर पद के लिए फिज़िकल फ़िटनेस टेस्ट के नए कड़े नियमों के चलते, उत्तर प्रदेश पुलिस के पाँच सिपाही पिछले कुछ दिनों में अपनी जान से हाथ धो बैठे और 90 सिपाही बेहोश होकर गंभीर रूप से बीमार हो गए.

उत्तर प्रदेश सरकार के नए नियमों के अंतर्गत सब इंस्पेक्टर बनने के लिए पुरुषों को सवा घंटे में दस किलोमीटर और महिलाओं को 45 मिनट में पाँच किलोमीटर की दौड़ लगाना अनिवार्य है.

पुराने नियमों में केवल सामान्य परेड और पीटी कराई जाती थी. इन्हीं नए नियमों के चलते गुरुवार को 34 वर्षीय हेड कांस्टेबल घनश्याम यादव और चालीस वर्षीय हरी राम की लखनऊ के अस्पताल में मौत हो गई.

ये दोनों मंगलवार को सीतापुर में दौड़ लगाते हुए बेहोश हो गए थे. दौड़ के समय बेहोश होने वालों में हाई ब्लड प्रेशर, शरीर में पानी की कमी और इलेक्ट्रोलाइट असंतुलन के लक्षण पाए गए. उनकी अंत में हृदयगति रुकने से मृत्यु हुई.

ख़बरें हैं कि नए नियमों को लेकर पुलिस फ़ोर्स में असंतोष है. लेकिन पुलिस महानिदेशक कर्म वीर सिंह का कहना है कि बाक़ी शारीरिक दक्षता परीक्षा निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार ही कराई जाएगी.

'ईमानदारी से लागू'

उत्तर प्रदेश पुलिस भर्ती एवं पदोन्नति बोर्ड के अध्यक्ष वीसी गोयल का कहना है कि शारीरिक दक्षता के नए नियम उत्तर प्रदेश सरकार ने 2008 में बनाए हैं और बोर्ड केवल उनको ईमानदारी से लागू कर रहा है.

गोयल का कहना है कि नियमों को बदलना उनके क्षेत्राधिकार में नहीं है. यह काम सरकार और पुलिस महानिदेशक का है.

साथ ही गोयल का यह भी कहना है कि सवा घंटे में दस किलोमीटर की दौड़ कोई कठिन काम नहीं है, लेकिन अगर क़रीब 15 फ़ीसदी पुलिस सिपाही शारीरिक रूप से सक्षम नहीं हैं तो यह चिंता की बात है.

पुलिस महानिदेशक कर्म वीर सिंह का कहना है कि इससे पहले उत्तर प्रदेश में पुलिस की भर्ती निष्पक्ष नहीं थी और उनमें पक्षपात के आरोप लगते रहे हैं.

यह सब ख़त्म करने के लिए 2008 में नए नियम बनाए गए, जिसमें सभी के लिए शारीरिक दक्षता के एक समान नियम बनाए गए. इसमें भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित की गई.

'बाद में पुनर्विचार'

पुलिस महानिदेशक का कहना है कि उत्तर प्रदेश में सिपाही से सब इंस्पेक्टर बनने की परीक्षा ग्यारह साल बाद हो रही है और अब इस समय उन सिपाहियों को दरोगा बनने से नहीं रोका जा सकता, जिन्होंने इम्तिहान पास कर लिया है.

हालाँकि सिंह ने यह भी कहा कि नए नियम के पक्ष और विपक्ष दोनों में तर्क दिए जा रहे हैं और यह बहस का मुद्दा है. मगर उनके अनुसार अब परीक्षा का वर्तमान दौर पूरा होने के बाद ही इस पर पुनर्विचार हो सकेगा.

पुलिस महानिदेशक का कहना है कि जो लोग शारीरिक रूप से सक्षम नही हैं उन्हें दौड़ में स्वयं शामिल नहीं होना चाहिए.

पुलिस महानिदेशक ने निर्देश दिए हैं कि दौड़ के स्थान पर डॉक्टर और एम्बुलेंस की व्यवस्था की जाए. अब दौड़ से पहले ब्लड प्रेशर की जांच भी की जा रही है.

उत्तर प्रदेश में वर्ष 1999 से 2008 तक सिपाही से सब इंस्पेक्टर की पदोन्नति का इम्तिहान ही नहीं हुआ. इसलिए इस समय 5389 पद खाली हैं. इन पदों के लिए लगभग 54000 लोगों ने आवेदन दिए. इनकी उम्र तीस साल से पचास साल के बीच है.

सिपाहियों की शिकायत

लिखित परीक्षा में 3892 लोग पास हुए, जिन्हें शारीरिक फ़िटनेस यानि दौड का इम्तिहान पास करना है. दौड़ कराने के लिए मेरठ, कानपुर, सीतापुर और आजमगढ़ में केंद्र बनाए गए. दौड़ में कोई हेर-फ़ेर न हो इसके लिए पैरों में एक चिप लगायी जाती है जो कंप्यूटर से जुडी होती है.

अब तक लगभग 3000 सिपाही दौड में शामिल हो चुके हैं. शेष 800 का इम्तिहान होना है. इसके बाद ग्रुप डिस्कशन होगा.

लेकिन लगभग सौ सिपाहियों के बेहोश होने और पाँच की मौत से पुलिस फ़ोर्स में इस बात की बहस छिड़ गई है कि सब इंस्पेक्टर के लिए दस किलोमीटर दौड़ का नियम कितना जरूरी है, जबकि उसका मुख्य काम मुक़दमों की जाँच करना होता है.

पिछले महीने एक स्थानीय अख़बार में कुछ पुलिस सिपाहियों के हवाले से यह ख़बर छपी थी कि शारीरिक दक्षता यानि दौड़ के नए नियम उचित नही हैं क्योंकि इस इम्तिहान में ३० साल से लेकर ५० साल तक के सिपाही और हवलदार बैठ रहे हैं.

अनियमित दिनचर्या और काम के बोझ से इस उम्र तक लोग ब्लड प्रेशर, मधुमेह और तनाव आदि बीमारियों से ग्रस्त हो जाते हैं. मगर सरकार ने इन खबरों पर ध्यान नहीं दिया.

संबंधित समाचार