तेलंगाना पर संसद में हंगामा

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Image caption विपक्ष ने ध्यान आकर्षण प्रस्ताव के ज़रिए पृथक तेलंगाना राज्य बनाए जाने पर सरकार से जवाब मांगा.

अलग तेलंगाना राज्य बनाने की मांग पर केंद्र सरकार के फ़ैसला ना लेने पर विपक्षी पार्टियों ने लोक सभा में हंगामा किया.

भारतीय जनता पार्टी की नेता सुषमा स्वराज और भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के सांसद गुरुदास दासगुप्ता ने तेलंगाना राज्य की स्थापना में हो रही देरी और इस पर सरकार की कार्रवाई पर एक ध्यानाकर्षण प्रस्ताव पेश किया.

दोनों ने ये स्पष्ट किया कि उनकी पार्टियां तेलंगाना को एक अलग राज्य का दर्जा देने का समर्थन करती हैं.

सुषमा स्वराज ने सरकार से अपील की, "सरकार अलग तेलंगाना के लिए विधेयक लाए और हमारी पार्टी इसका समर्थन करेगी."

इस पर गृह मंत्री पी चिदंबरम ने कहा कि दोनों पार्टियों के बदले हुए पक्ष को ध्यान में रख लिया गया है और सरकार को इंतज़ार है कि आंध्र प्रदेश की सभी पार्टियां इस मुद्दे पर अपना मत स्पष्ट कर दें ताकि कोई फ़ैसला लिया जा सके.

बातचीत जारी

तेलंगाना के अलग राज्य बनाए जाने के बारे में पाँच सदस्यों वाली जस्टिस श्रीकृष्ण समिति ने 31 दिसंबर 2010 को गृह मंत्रालय को अपनी रिपोर्ट सौंपी थी और केंद्रीय गृह मंत्री पी चिदंबरम ने इस रिपोर्ट को दिल्ली में आंध्रप्रदेश के सांसदों की एक सर्वदलीय बैठक में छह जनवरी 2011 को रखा था.

गृह मंत्री पी चिदंबरम ने कहा कि छह जनवरी की सर्वदलीय बैठक के बाद से सभी पार्टियों से बातचीत जारी है, लेकिन चार पार्टियों (टीडीपी, एमआईएम, वायएसआर कांग्रेस, कांग्रेस) ने अभी तक अपना पक्ष स्पष्ट नहीं किया है.

उन्होंने कहा कि वो आंध्र प्रदेश के युवाओं से अपील करते हैं कि वो आत्महत्या जैसे कदम ना उठाएं क्योंकि बातचीत अभी जारी है. साथ ही उन्होंने कहा कि बातचीत की प्रक्रिया में कुछ दिनों से कुछ महीने भी लग सकते हैं, इसलिए धीरज रखना चाहिए.

गृह मंत्री पी चिदंबरम ने कहा कि आंध्र प्रदेश में एक बड़ा तबका है जो अलग तेलंगाना राज्य के पक्ष में नहीं है, इसलिए संसद में ऐसा कुछ नहीं कहा और किया जाना चाहिए जो वहां लोगों को भड़काने का काम करे.

विपक्ष की मांग

भारतीय जनता पार्टी की नेता सुषमा स्वराज ने कहा कि तेलंगाना राज्य बनाए जाने पर सरकार की देरी के विरोध में तेलंगाना से चुने गए 17 में से 13 सासंदों ने इस्तीफ़ा दे दिया है.

स्वराज ने बताया कि वर्ष 2004 में साझा न्यूनतम कार्याक्रम में यूपीए ने अलग तेलंगाना राज्य के मुद्दे पर सहमति बनाने का वादा किया लेकिन पूरे पांच साल में ये नहीं हुआ.

भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के सांसद गुरुदास दासगुप्ता ने कहा कि उनकी पार्टी अलग तेलंगाना राज्य का समर्थन करती है.

दासगुप्ता ने सरकार ने कहा, "मैं सरकार से अपील करता हूं कि वो इस मुद्दे पर जल्द फ़ैसला ले ताकि पूरे इलाक़े में शांति स्थापित हो सके."

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Image caption पिछले कुछ समय में तेलंगाना इलाके में कई बार विरोध प्रदर्शन और बंद का आह्वान किया गया है.

तेलंगाना से कांग्रेस के सांसद सर्वे सत्यनारायण ने कहा कि तेलंगाना राज्य की स्थापना होकर रहेगी और ये वहां के लोगों का जन्मसिद्ध अधिकार है. उन्होंने ये भी कहा कि उन्हें विश्वास है कि तेलंगाना को अलग राज्य बनाए जाने को यूपीए अध्यक्ष सोनिया गांधी का समर्थन है.

अलग तेलंगाना राज्य की मांग के साथ अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठे तेलंगाना राष्ट्र समिति के अध्यक्ष के चंद्रशेखर राव का अनशन ख़त्म करने के लिए नौ दिसंबर 2009 की रात गृहमंत्री ने घोषणा की थी कि केंद्र सरकार तेलंगाना राज्य की स्थापना की प्रक्रिया शुरु करेगी.

तेलंगानावादी संगठनों ने इस पर ज़ोरदार जश्न मनाया और कहा था कि तेलंगाना को राज्य बनाने का उनका पचास वर्ष पुराना सपना पूरा हो गया है.

इसके बाद केंद्र सरकार ने इस मुद्दे पर जस्टिस श्रीकृष्ण की अगुवाई में एक पांच सदस्यीय समिति बनाई थी जिसने 31 दिसंबर को गृहमंत्रालय को अपनी रिपोर्ट सौंपी थी.

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