नया खाद्य क़ानून देश में लागू

दुकान
Image caption इस क़ानून के अंतर्गत एक प्राधिकरण की स्थापना की जाएगी जो स्वास्थ्य मंत्रालय के अंतर्गत एक स्वायत्त संस्था होगी

पाँच वर्ष पहले भारतीय संसद में पास किया गया खाद्य सुरक्षा और मापदंड क़ानून, 2006 लागू हो गया है.

इस क़ानून के अंतर्गत सड़कों पर ठेला लगाने वाले, फेरी लगाने वाले, और दूसरे दुकानों को लाइसेंस लेना होगा, उन्हें अपने यहाँ सफ़ाई और दूसरी कई बातों पर ध्यान देना होगा, अन्यथा उनके ख़िलाफ़ कार्रवाई हो सकती है.

भारत में खाने-पीने वाली जगहों में सफ़ाई एक बड़ी चिंता का विषय रही है. खाद्य वस्तुओं को ढँक कर नहीं रखना, उनमें मक्खियाँ भिनभनाते रहना एक आम दृश्य है.

इस क़ानून के अंतर्गत एक प्राधिकरण की स्थापना की जाएगी, जो स्वास्थ्य मंत्रालय के अंतर्गत एक स्वायत्त संस्था होगी.

पाँच साल बाद क़ानून के लागू होने का कारण है सरकार के पास खाद्य सामानों की जाँच के लिए प्रयोगशालाओं की कमी थी. सरकार ने इस अंतराल में तैयारियाँ की, नई प्रयोगशालाओं का निर्माण किया और अफ़सरों की नियुक्ति की गई.

नया क़ानून पुराने क़ानून खाद्य मिलावट कानून, 1954 की जगह लेगा.

क़ानून

क़ानून के अंतर्गत मिलावटखोरों के ख़िलाफ़ कड़ी कार्रवाई करने की बात की गई है. अफ़सरों को किसी भी जगह की खोज, जाँच का अधिकार होगा.

लेकिन सवाल ये कि क्या ऐसे क़ानूनों का कोई फ़ायदा होने वाला है, क्योंकि क़ानून तो कई हैं, लेकिन उन्हें लागू करना अधिकारियों के लिए सबसे बड़ी चुनौती होती है.

जब बीबीसी ने दरियागंज में फेरीवालों से इस बारे में बात की, तो या तो उन्हें इस क़ानून के बारे मे पता नहीं था, या वो आश्वस्त थे कि उनके ख़िलाफ़ कार्रवाई की संभावना ना के बराबर है.

दरियागंज की मेरी माइकल इस इलाक़े में 35 सालों से रह रही हैं. वो कहती हैं कि ज़रूरत है कि लोगों को सफ़ाई के बारे में शिक्षित किया जाए और उन्हें नहीं पता कि सरकार इस क़ानून को लागू करवाने के लिए क्या क़दम उठाने पर विचार कर रही है.

हालाँकि इस बारे में एक विचार ये भी है कि ये क़दम ग़रीब फेरीवालों को नुकसान पहुँचाएगा.

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