'यूपी में स्मारकों पर अतिरिक्त ख़र्च हुआ'

  • 6 अगस्त 2011
स्मारक
Image caption सीएजी के अनुसार उत्तर प्रदेश सरकार ने दो स्मारकों पर ज़रुरत से अधिक ख़र्च किया.

भारत के नियंत्रक और महालेखाकार ने अपनी एक रिपोर्ट में कहा है कि उत्तर प्रदेश सरकार ने अपने दो प्रोजेक्टों में 66 करोड़ रुपए ज़रुरत से अधिक ख़र्च किए हैं.

ये दो परियोजनाएं हैं लखनऊ स्थित भीमराव अंबेडकर सामाजिक परिवर्तन स्थल और मान्यवर कांशी राम स्मारक स्थल.

इन्हें बनवाने का जिम्मा राजकीय निर्माण निगम के पास था. महालेखाकार ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि इन परियोजनाओं के लिए 15 करोड़ रुपए में राजस्थान से पत्थर मंगवाए और फिर उन्हें वापस राजस्थान भेजा गया.

इसके अलावा परियोजनाओं के ठेकों में संशोधन कर भी सरकार ने 22 करोड़ रुपए का टाला जा सकने वाला ख़र्च किया.

इस रिपोर्ट के शुक्रवार को उत्तर प्रदेश विधान सभा में रखा गया है.

टाला जा सकने वाला ख़र्च

Image caption सीएजी के अनुसार चुनार के पत्थरों को राजस्थान भेजना और वहां से वापस लखनऊ लाना ग़ैर-ज़रुरी था.

रिपोर्ट में कहा गया है कि इन दोनों परियोजनाओं के लिए शुरू में 881.22 करोड़ रुपए का बजट था. इसमें से भीमराव अंबेडकर सामाजिक परिवर्तन स्थल के 366.82 करोड़ रुपए और मान्यवक कांशीराम स्मारक स्थल के लिए 514.4 करोड़ का बजट था.

लेकिन 31 दिसंबर 2009 को ये ख़र्च 2451.93 करोड़ तक पहुंच गया.

रिपोर्ट में कहा गया है कि इसमें 2261.19 करोड़ रुपए नवंबर 2007 से दिसंबर 2009 के बीच जारी किए गए.

नियंत्रक और महालेखाकार की रिपोर्ट में कहा गया है कि इन दोनों परियोजनाओं के लिए मिर्ज़ापुर के चुनार से पत्थर राजस्थान के बयाना में ले जाए गए जहां उनपर कारीगरी करने के बाद उन्हें वापस लखनऊ लाया गया.

रिपोर्ट में कहा गया है कि अगर मिर्ज़ापुर के चुनार में ही पत्थरों को तराशा जाता तो 15.6 करोड़ रुपए बच जाते.

रिपोर्ट में ये भी कहा गया है कि राजकीय निर्माण निगम ने कुछ काम ऊंची कीमतों पर करवाए जिसके चलते कई करोड़ रुपए अधिक ख़र्चा हुए.

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