‘अंग्रेज़ी’ रंग में रंगेगा कोलकाता !

  • 7 अगस्त 2011
लंदन आई इमेज कॉपीरइट AP
Image caption लंदन आई की तर्ज पर हुबली के किनारे फेरी के विशाल पहिए का प्रारुप बनाने की योजना है.

अंग्रेज़ों के शासन काल में भारत की राजधानी रहा कोलकाता शहर अपने नए रंग-रुप और नए कलेवर के लिए एक बार फिर अंग्रेज़ी हुक़ूमत के नक्शे क़दम पर चलेगा.

पश्चिम बंगाल की नव निर्वाचित मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने राज्य की राजधानी कोलकाता को दूसरा लंदन बनाने की मंशा ज़ाहिर की है.

कोलकाता की काया पलट के मकसद से शुरु की जा रही इस परियोजना की शुरुआत हुबली नदी के किनारे 'लंदन आई' की तर्ज पर फेरी के एक विशाल पहिए का प्रारुप बनाने से होगा.

बीबीसी संवाददाता राहुल टंडन के मुताबिक इस परियोजना का मकसद किसी समय देश की आर्थिक राजधानी रहे कोलकाता की छवि को एक बार फिर जीवित करना है.

भारत पर अंग्रेज़ों के शासनकाल में 1911 तक कोलकाता को राजधानी का दर्जा प्राप्त था. शहर में आज भी अंग्रेज़ी स्थापत्य की झलक मौजूद है.

अंग्रेज़ी स्थापत्य की झलक

कोलकाता की बनावट बहुत कुछ लंदन जैसी है लेकिन अपनी चरमराई अर्थव्यवस्था के चलते इस शहर ने पुरानी साख खो दी है.

ऐसे में मुख्यमंत्री ममता बनर्जी का कहना है कि वो भारत के सबसे बड़े शहर कोलकाता को विश्व के श्रेष्ठ महानगरों में से एक बनाना चाहती हैं.

इस परियोजना के तहत हुबली के तट पर लंदन आई की तर्ज पर बने फेरी के एक विशाल पहिए के अलावा पार्क और रेस्त्रां बनाए जाएंगे.

ममता बनर्जी का नारा है कि वो कोलकाता में लंदन शहर बसाना चाहती हैं.

हालांकि ममता बनर्जी की इस सोच से कई लोग सहमत नहीं.

शहरी विकास मामलों के जानकार एहसान साहा कहते हैं, ''फिलहाल तो ये केवल एक शिगुफ़ा भर नज़र आ रहा है. इस तरह की परियोजनाओं से पहले कोलकाता में बुनियादी स्तर पर कई सुधार किए जाने की ज़रूरत है. जैसे साफ़-सफ़ाई, प्रदूषण, सीवेज का निपटारा.''

इस परियोजना के पहले फेज़ का काम 2013 तक खत्म होगा.

बहुत से लोग ये मानते हैं कि अंग्रेज़ों के शासन का सूर्य भले ही अस्त हो चुका हो लेकिन कोलकाता शहर आज भी अपने खोए अस्तित्व की पहचान के लिए अंग्रेज़ी हुक़ूमत से प्रेरणा ले रहा है.

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