एनडीए का विशेषाधिकार नोटिस

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राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन ने लोकसभा और राज्यसभा में खेल मंत्री अजय माकन के राष्ट्रमंडल खेलों से जुड़े बयान पर विशेषाधिकार नोटिस दिया है.

भाजपा को खेल मंत्री अजय माकन के लोक सभा में दिए बयान पर आपत्ति है. खेल मंत्री का कहना था कि कांग्रेस सरकार ने नहीं बल्कि एनडीए सरकार ने सुरेश कलमाडी की नियुक्ति की थी. एनडीए की माँग है कि इस मुद्दे पर प्रश्न काल सस्पेंड किया जाए और मसले पर बहस हो.

वहीं संसद के बाहर अजय माकन ने कहा है कि वे अपने बयान पर कायम हैं. उन्होंने कहा है, “राज्य सभा में प्रक्रिया ये है कि जब मंत्री सदन में कोई बयान देता है तो उससे स्पीष्टीकरण माँगा जाता है. मैं ख़ुद इसके लिए तैयार हूँ. लेकिन विपक्ष अगर बोलने देगा तभी तो मैं स्पष्टीकरण दे सकता हूँ. विपक्ष सिर्फ़ हंगामा करना चाहते थे. मैं फिर कहता हूँ कि जिन लोगों ने सुरेश कलमाड़ी को राष्ट्रमंडल आयोजन समिति का अध्यक्ष चुना था वे एनडीए के सदस्य थे.”

सोमवार को लालकृष्ण आडवाणी की अध्यक्षता में हुई एनडीए की बैठक में ये फ़ैसला हुआ कि यदि उनके नोटिस ख़ारिज कर दिए जाते हैं तो वे लोकसभा और राज्यसभा को चलने नहीं देंगे.

समाचार एजेंसी पीटीआई के मुताबिक सरकार अजय माकन को लेकर बहस के लिए तैयार है लेकिन सीएजी के मुद्दे पर नहीं.

इस्तीफ़े की माँग ठुकराई

अजय माकेन और शीला दीक्षित के मुद्दे को लेकर सोमवार सुबह संसद की हंगामेदार शुरुआत हुई. जैसे ही स्पीकर मीरा कुमार ने प्रश्न काल शुरु किया, एनडीए सदस्यों ने नारे लगाने शुर कर दिए.

हंगामे को देखते हुए मीरा कुमार ने पहले दोपहर 12 बजे तक और बाद में दिन भर के लिए कार्यवाही स्थगित कर दी.

भाजपा ने शीला दीक्षित के इस्तीफ़े की माँग की. सीएजी की रिपोर्ट में राष्ट्रमंडल खेलों के आयोजन में धांधली की रिपोर्ट पर ये हंगामा हुआ.

हालांकि दोपहर को हुई पत्रकार वार्ता में केंद्रीय मंत्री कपिल सिब्बल ने शीला दीक्षित के इस्तीफ़े की माँग को खारिज कर दिया. उन्होंने तंज कसते हुए कहा, अगर विपक्ष कहे कि पहले मुख्यमंत्री या प्रधानमंत्री इस्तीफ़ा दें तभी सदन की कार्यवाही चलने दी जाएगी तो ये बहुत अच्छा सुझाव है.

सीएजी की रिपोर्ट आने के बाद से ही भाजपा शीला दीक्षित के इस्तीफ़े की माँग कर रही है.

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