मु्स्लिम युवाओं को मुआवज़े की अनुशंसा

  • 9 अगस्त 2011

राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग ने आंध्र प्रदेश सरकार को एक पत्र लिख कर कहा है कि सरकार मक्का मस्जिद विस्फोट मामले से जुड़े ऐसे हर युवा को तीन लाख रुपए का मुआवज़ा अदा करे जिन्हें पुलिस ने गिरफ़्तार किया था. चार वर्ष पहले हैदराबाद की मक्का मस्जिद में बम विस्फोट हुआ था.

इन अनुशंसाओं से ऐसे 26 युवाओं को फ़ायदा मिल सकता है जिन्हें अदालत ने बरी कर दिया था.अल्पसंख्यक आयोग के अध्यक्ष वजाहत हबीबुल्लाह ने मुख्यमंत्री किरण कुमार रेड्डी को भेजे गए पत्र में छह अहम सिफारिशें की हैं.

इनमें हर पीड़ित युवा को तीन लाख रुपए का मुआवज़ा और पुलिस अधिकारीयों के विरुद्ध कार्रवाई शामिल है.आयोग ने कहा कि मुआवज़े की राशि भी पुलिसवालों से अदा करवाई जाए.

साथ ही आयोग ने कहा है कि तमाम युवाओं को सरकार उनकी क्षमता के अनुसार नौकरियां दे और उन्हें अच्छा चरित्र होने का एक प्रमाण पत्र भी दे.

आयोग ने यह कार्रवाई उस शिकायत के आधार पर की है जो हैदराबाद के एक संगठन हेल्प हैदराबाद के अध्यक्ष मेजर एसजीएम् कादरी ने की थी.

शिकायत ये थी कि पुलिस ने मुस्लिम युवाओं का जीवन बर्बाद किया है.कादरी ने कहा है कि अदालत से बरी हो जाने के बावजूद इन युवाओं को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है और कोई उन्हें नौकरी देने के लिए तैयार नहीं है.

इस शिकायत के बाद वजाहत हबीबुल्लाह ने हैदराबाद का दौरा करके युवाओं से भी बातचीत की थी और उनकी रिपोर्ट पर विचार के बाद ही आयोग ने यह सिफ़ारिशें की हैं.

मक्का मस्जिद विस्फोट

मक्का मस्जिद में बम विस्फोट के बाद स्थानीय पुलिस ने कम से कम 100 युवाओं को गिरफ़्तार किया था. इनमें से 26 पर अलग- अलग मामले दर्ज किए गए और बाक़ी को छोड़ दिया गया.

बाद में अदालतों ने उन 26 युवाओं को भी बरी कर दिया. इसके बाद से मुस्लिम समुदाय राज्य सरकार से यह मांग करता रहा कि इन युवाओं को मुआवज़ा अदा किया जाए.

इस बीच सीबीआई ने मक्का विस्फोट की छान बीन अपने हाथ में ली और संबंध में स्वामी असीमानंद सहित कुछ ऐसे लोगों को गिरफ्तार किया गया जिनका संबंध आरएसएस से था.

इसके बावजूद भी उन मुस्लिम युवाओं की परेशानियाँ ख़त्म नहीं हुई. उन्होंने अदालत में भी याचिका दाखिल की और मांग की थी कि उनमें से हर एक युवा को 20 लाख रुपए का मुआवज़ा अदा किया जाए.

सरकार ने आयोग से कहा है कि इनमें से नौ युवाओं को पहले ही अल्पसंख्यक फिनांस कॉरपोरेशन से ऋण दिया जा चुका है.

लेकिन मेजर कादरी ने इसका खंडन किया है और कहा है कि किसी युवा को ऋण नहीं मिला. दूसरी ओर आयोग ने सरकार से कहा है कि कर्ज़ और मुआवज़ा अलग-अलग बातें हैं और युवाओं को ऋण नहीं मुआवज़ा दिया जाए.

मेजर कादरी ने राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग की सिफा़रिशों का स्वागत करते हुए कहा है कि मुआवज़ा मिलना अच्छी बात है लेकिन उससे भी महत्त्वपूर्ण बात यह है कि सरकारी रूप से यह बात मान ली गई है की यह युवा निर्दोष हैं.

संबंधित समाचार