जगन की संपत्ति की सीबीआई जाँच

  • 11 अगस्त 2011
जगन मोहन रेड्डी
Image caption अदालत के इस आदेश ने राजनैतिक गलियारों में हलचल मचा दी है.

वाईएसआर कांग्रेस पार्टी के अध्यक्ष और लोकसभा सदस्य वाईएस जगनमोहन रेड्डी को एक तगड़ा झटका लगा है. आंध्र प्रदेश के उच्च न्यायालय ने सीबीआई को आदेश दिया है कि वो उनकी संपत्ति की संपूर्ण जाँच करे और पता लगाए की उनकी कंपनियों में पूँजी कहाँ से आई.

अदालत ने कहा है कि भ्रष्टाचार निरोधक कानून और मनी लॉंड्रिंग कानून के अंतर्गत ये छानबीन की जाए.

मुख्य न्यायाधीश निसार अहमद काकरू और न्यायाधीश वलास अफ़जलपुरकर की खंडपीठ ने ये आदेश उन जनहित याचिकाओं पर जारी किए, जो राज्य के एक मंत्री पी शंकर राव, तेलुगुदेसम के तीन नेताओं और कडपा के एक वकील ने मिल कर दाख़िल की थी.

इन्होंने माँग की थी कि जगन की संपत्ति की छानबीन करवाई जाए क्योंकि उन्हें संदेह है की ये संपत्ति अवैध तरीके से इकट्ठा की गई है.

खंडपीठ ने जगनमोहन रेड्डी के वकील के इस तर्क को रद्द कर दिया कि अदालत में ये याचिकाएँ राजनीतिक बदले की भावना से और उन्हें बदनाम करने के लिए दाख़िल की गई हैं.

अदालत ने कहा कि उसके सामने जो दस्तावेज़ रखे गए, उससे इस तरह की छानबीन के आदेश देने के आधार मिले हैं.

राजनीतिक खलबली

वाईएसआर कांग्रेस के नेताओं ने कहा है कि वे हाई कोर्ट के इस आदेश के ख़िलाफ़ सुप्रीम कोर्ट में अपील करेंगे.

अदालत ने विशेषकर सीबीआई को इस बात का पता लगाने के लिए कहा है कि जगन की कंपनियों जगती पब्लिकेशन और भारती सीमेंट में पूँजी निवेश कहाँ से आया.

सीबीआई की प्रारंभिक छानबीन में ये बात सामने आई है कि जगती पब्लिकेशन में 1200 करोड़ रुपये और भारती सीमेंट में 1800 करोड़ का पूँजी निवेश किया गया था.

अदालत के इस आदेश ने राजनीतिक गलियारों में हलचल मचा दी है क्योंकि छानबीन के जो भी परिणाम निकलेंगे, उसका जगनमोहन रेड्डी के भविष्य पर दूरगामी असर पड़ेगा.

शंकर राव ने जगन पर आरोप लगाया था कि उनकी कंपनियों में उन्ही लोगों और कंपनियों ने निवेश किया है, जिन्हें जगन के पिता वाईएस राजशेखर रेड्डी की सरकार ने भूमि आवंटित की थी या खनन के ठेके दिए थे.

माना जा रहा है कि जगन की संपत्ति की छानबीन अन्य लोगों के लिए भी मुश्किलें खड़ी कर सकती है जिनमें वाईएसआर की सरकार के मंत्री भी शामिल हैं.

साथ ही उच्य न्यायालाय ने दुबई की कम्पनी एमार प्रापर्टी को 2004 में वाईएसआर सरकार की ओर से हैदराबाद में 258 एकड़ भूमि आवंटित किए जाने और इसमें हुई कथित अनियमितताओं की छानबीन का भी आदेश दिया है.

2004 से लेकर 2009 तक मुख्यमंत्री रहने वाले वाईएसआर का सितम्बर 2009 में एक हेलिकॉप्टर दुर्घटना में निधन हो गया था.

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