'तुषार मेहता ने राजनीतिक ज्ञापन बनाया'

  • 12 अगस्त 2011
नरेंद्र मोदी( फ़ाईल फ़ोटो)
Image caption एसआईटी की पूछताछ के बाद बाहर निकलते हुए नरेंद्र मोदी.

संजीव भट्ट ने अपने हलफ़नामे में कहा है कि गुजरात दंगों की जांच के लिए सुप्रीम कोर्ट के ज़रिए गठित एसआईटी ने जब मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी से पूछताछ की तो उसके बाद अतिरिक्त महाधिवक्ता तुषार मेहता ने राजनीतिक ज्ञापन बनाने में मदद की.

हलफ़नामे के अनुसार एसआईटी ने 27-28 मार्च, 2010 को नरेंद्र मोदी से पूछताछ की थी.

तीस मार्च 2010 को गुरुमूर्ति स्वामीनाथन ने राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री को सौंपे जाने के लिए एक ज्ञापन तैयार किया और उसे नरेंद्र मोदी, गुजरात के तत्कालीन गृह मंत्री अमित शाह और महेश जेठमलानी को भेजा.

इस ज्ञापन को दिल्ली में वरिष्ठ भाजपा नेता लाल कृष्ण आडवाणी, सुषमा स्वराज, अरूण जेटली और नितिन गडकरी के ज़रिए राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री को सौंपना था जिसमें सामाजिक कार्यकर्ता तीस्ती सीतलवाड़ और उनकी संस्था के ख़िलाफ़ जाँच के आदेश देने की अपील की गई थी.

31 मार्च, 2010 को गुरुमूर्ति ने महेश जेठमलानी, राम जेठमलानी, प्रणब बादेखा और अमित शाह को एक नोट बनाकर भेजा. उसमें गुरुमूर्ति ने कहा कि ज्ञापन देने से कई लोग बचाव के मुद्रा में आ जाएंगे.

अमित शाह ने 18 अप्रैल, 2010 को उस नोट और ज्ञापन की कॉपी तुषार मेहता के पास भेजी.

तुषार मेहता ने उसी रात दिल्ली स्थित गुजरात के रेज़िडेंट कमिश्नर को अपने सरकारी ई-मेल से उस नोट और ज्ञापन को भेजा.

गुरुमूर्ति ने अपने नोट में कहा था कि एसआईटी अपनी स्वतंत्रता दिखाने के लिए अपनी रिपोर्ट में कह सकती है कि गुजरात दंगों के दौरान मुख्यमंत्री से कुछ लापरवाही ज़रूर हुई है लेकिन वो अपराध की श्रेणी में नहीं आते.

गुरुमूर्ति ने ये भी कहा कि एक राजनीतिक चाल के रूप में राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री को ज्ञापन सौंपने से बहुत सारे लोग बचाव की मुद्रा में आ सकते हैं.

संजीव भट्ट के हलफ़नामे के अनुसार तुषार मेहता राज्य के अतिरिक्त महाधिवक्ता होते हुए भी राजनीतिक ज्ञापन को बनाने में पूरी तरह सक्रिय थे.

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