तेलंगाना में फिर जीवन अस्त व्यस्त

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Image caption हैदराबाद में सरकारी नौकरियों में भर्ती पर चला आ रहा क्षेत्रीय विवाद और भी जटिल होता जा रहा है.

हैदराबाद सहित तेलंगाना के तमाम नौ ज़िलों में आम जीवन अस्त-व्यस्त हो कर रह गया जब तेलंगाना के छात्र संगठनों की ओर से बुलाया गया बंद पूरी तरह सफल रहा.

बुधवार को स्कूल, कॉलेज, दुकानें, वाणिज्य संस्थान बंद रहे. परिवहन निगम की छह हज़ार से ज़्यादा बसें सड़कों पर नहीं आईं और हज़ारों यात्री जगह जगह फंसे रहे.

हैदराबाद में पुलिस सब इंस्पेक्टरों की नियुक्तियों के लिए बाहरी परीक्षार्थियों को इजाज़त दिए जाने के विरोध में तेलंगाना छात्र संयुक्त संघर्ष समिति ने इस बंद का आह्वान किया था.तेलंगाना संयुक्त संघर्ष समिति और तेलंगाना राष्ट्र समिति ने भी इस बंद का समर्थन किया.

बंद के दौरान कुछ स्थानों पर हिंसक घटनाएं हुई और प्रदर्शनकारियों ने आंध्र प्रदेश की ट्रांसपोर्ट कंपनियों की बसों पर पथराव किया और उनके शीशे तोड़ डाले.

ऐसी ही हिंसक घटनाएं हैदराबाद, नलगोंडा और महबूबनगर में हुई.

मामला

मंगलवार को ही केंद्र सरकार ने फैसला किया था कि हैदराबाद की ‘फ्री ज़ोन’ की हैसियत को समाप्त करने के लिए 1975 के राष्ट्रपति के अध्यादेश में संशोधन किया जाएगा.

इसके लिए सरकार ने राष्ट्रपति से सिफारिश की है कि वो इस अध्यादेश से धारा 14 एफ़ को निकाल दे जिसके अंतर्गत राज्य के किसी भी क्षेत्र के लोग हैदराबाद में नौकरियों के लिए अर्ज़ी दे सकते थे.

केंद्र के इस फ़ैसले के बावजूद तेलांगाना-वादी संगठनों ने आंदोलन जारी रखने का फैसला किया है क्योंकि उनके अनुसार जब तक इस फैसले को लागू नहीं किया जाता, वे उस पर भरोसा नहीं कर सकते.

तेलंगाना राष्ट्र समिति ने एक कदम आगे बढ़ाते हुए कहा है कि केवल धारा 14 ऍफ़ ही नहीं बल्कि पूरे अनुच्छेद को ही रद्द कर दिया जाना चाहिए.

टीआरएस के नेता हरीश राव ने कहा कि अनुच्छेद 14 के अंतर्गत राज्य सचिवालय और राज्य स्तर के दूसरे कार्यालयों और संस्थानों में दूसरे क्षेत्रों के लोगों को भर्ती किया जा रहा है.

उनका कहना था, “हैदराबाद में राज्य सचिवालय और दूसरे बड़े विभाग आंध्र वालों से भरे हैं. वहां तेलंगाना का कोई व्यक्ति नहीं है.”

उन्होंने कहा की जब तक इस पूरे अनुच्छेद को ही रद्द नहीं कर दिया जाता, ये आंदोलन जारी रहेगा.

पिछले एक महीने में तेलंगाना में ये तीसरा बंद है.इधर तेलंगाना क्षेत्र को 17 अगस्त से अनिश्चितकाल हड़ताल का भी सामना करना है जिसमें सरकारी कर्मचारी, अधिकारी, अध्यापक और मज़दूर से लेकर सफ़ाई कर्मचारी तक भाग लेने वाले हैं.

अलग तेलंगाना राज्य की स्थापना की मांग के समर्थन में ये बंद बुलाया गया है.

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