संजीव भट्ट की ज़ुबानी

संजीव भट्ट का हलफ़नामा (फ़ाईल फ़ोटो)
Image caption संजीव भट्ट ने अपने हलफ़नामे ने सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में काम कर रहे एसआईटी के काम काज पर गंभीर सवाल उठा दिए हैं.

संजीव भट्ट ने अपने हलफ़नामें मे कहा है कि अहमदाबाद में हुए इशरत जहाँ मुठभेड़ के मामले में भी अभियोजन और बचाव पक्ष एक साथ मिले हुए थे.

मुंबई की इशरत जहाँ और उनके तीन साथी 15 जनवरी, 2004 में गुजरात के अहमदाबाद में हुए एक मुठभेड़ में मारे गए थे.

अहमदाबाद पुलिस ने चारों मृतकों पर चरमपंथी संगठन लश्करे-तैबा का सदस्य होने का आरोप लगाते हुए कहा था कि वे गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी की हत्या करना चाहते थे.

लेकिन इशरत के घर वाले गुजरात पुलिस की दलील को मानने के लिए तैयार नहीं थे.

उन्होंने इसके ख़िलाफ़ अदालत का दरवाज़ा खटखटाया था और गुजरात हाईकोर्ट ने इस मुठभेड़ की जांच एक विशेष जांच दल के हवाले कर दिया था.

इससे पहले सात सितंबर, 2009 को अहमदाबाद मेट्रोपोलिटन मजिस्ट्रेट ने अपनी जांच रिपोर्ट में मुठभेड़ को फ़र्ज़ी क़रार दिया था और गुजरात पुलिस के असिस्टेंट कमिश्नर जीएल सिंघल को अभियुक्त बनाया था.

हलफ़नामा

सुप्रीम कोर्ट में संजीव भट्ट के ज़रिए दायर हलफ़नामें के अनुसार 24 सितंबर, 2009 को राज्य के अतिरिक्त महाधिवक्ता तुषार मेहता ने गुजरात गृह मंत्रालय के अवर सचिव विजय बादेखा को सिंघल की तरफ़ से एक ड्राफ़्ट भेजा जिसमें मेट्रोपोलिटन मजिस्ट्रेट की जांच रिपोर्ट को ख़ारिज करने की अपील की गई थी.

27 जनवरी, 2010 में तुषार मेहता ने जीएल सिंघल के वकील महेश अग्रवाल को एक ड्राफ़्ट हलफ़नामा भेजा जो सिंघल की तरफ़ से सुप्रीम कोर्ट में दाख़िल किया जाना था.

छह मई, 2010 को अमित शाह ने मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव जीसी मुर्मु और तुषार मेहता को एक नोट भेजा जिसमें कहा गया था कि सीबीआई ने पुलिस अधिकारी जीएल सिंघल से सोहराबुद्दीन फ़र्ज़ी मुठभेड़ मामले में भी पूछताछ करने का फ़ैसला इसलिए किया है ताकि गुजरात पुलिस के मनोबल को नीचा किया जा सके.

Image caption जबसे गुजरात के क्राइम ब्रांच के अधिकारियों को गिरफ़्तार किया गया है तब से ना तो कोई चरमपंथी हमले हुए हैं और ना ही कोई मुठभेड़.

इन सभी ई-मेल के अध्ययन से साफ़ पता चलता है कि अतिरिक्त महाधिवक्ता तुषार मेहता और कुछ दूसरे अधिकारी इशरत जहाँ मुठभेड़ के एक अभियुक्त जीएल सिंघल को बचाने की पूरी कोशिश कर रहें हैं.

मेट्रोपोलिटन मजिस्ट्रेट ने अपनी जांच रिपोर्ट में सिंघल को अभियुक्त बनाया था और फिर हाई कोर्ट के आदेश पर गठित विशेष जांच दल सिंघल के ख़िलाफ़ जांच कर ही है.

लेकिन फ़िलहाल सुप्रीम कोर्ट की दो न्यायाधीशों की पीठ ने विशेष जाँच दल की कार्रवाई को स्थगित कर दिया है.

इस मामले में भी वही पुरानी कहानी है, एक तरफ़ तुषार मेहता राज्य के दूसरे अधिकारियों के साथ मिलकर सरकारी हलफ़नामे का ड्राफ़्ट तैयार करते हैं और दूसरी तरफ़ वही अधिकारी अभियुक्तों के ज़रिए दायर किए जाने वाले याचिकाओं और हलफ़नामे को भी तैयार करते हैं.

संबंधित समाचार